31 मार्च 2009

नकाब .....

नकाब ओढे आती है जिंदगी ,

छूने जाते हैं तो रेत सी फिसल जाती है जिंदगी ...

===============================

सूखे दरख्तों पर फूल कहाँ ?

गमगिनसे माहौलमें पनपेगी जिंदगी कहाँ ?

===============================

कानोंमें पूछती है क्यों तू हरदम मुझे सवाल ?

पढ़ ले किस्मत आज इन सफों पर मेरे जवाब ......

1 टिप्पणी:

  1. bahut khoobsoorat..........
    naqaab odhe aati hai zindagi
    choone jate hain to ret si fisal jati hai zindagi
    sahi kaha zindagi ka falsafa

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...