9 जनवरी 2009

सहस्त्रधारा....!!!






हमारा दूसरा पड़ाव है सहस्त्रधारा ...

हरिद्वारसे हिमालय के चरणस्पर्श कर के थोड़े और आगे चलते है आगे राजाजी नेशनल पार्क पडता है राष्ट्रीय अभियारान्य का गौरव प्राप्त है जीप में बिठाकर सैर कर सकते है जो वहीं किराये पर मिलती है वैसे हम समयके अभावके कारण वहां जा नही पाए पर वाइल्डलाइफ के चाहक इधर जरूर जाए ।

देहरादून की ओर चलते रास्ते पर आती है यह सहस्त्रधारा॥

हाँ ,यहाँ एक सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य की धारा है जगह पर जाते वैसे कोई खूबी तुरंत नज़र नहीं आती है पर यह पुरी जगह अपने आप में एक अजूबा है एक पहाड़ी से गिरते हुए जल को एक प्राकृतिक तरीके से ही संचित किया गया है कहा जाता है की यह जल गंधक मिश्रित होता है जिसके उपयोग से चमडी के दर्द ठीक हो सकते है थोड़े से दूर पहाड़ी पर आगे चलते है वंही है असली अजूबा पहाड़ी के अन्दर प्राकृतिकरूप से तराशी हुई कई छोटी छोटी गुफा है जो बाहरसे तो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती किंतु इन गुफा में जब प्रवेश करते है तो उनकी छत अविरत रिमज़िम हलकी बारिश की बौछारों की तरह टपकती रहती है यही सहस्त्रधारा है ।

वहां कई माता पिता अपने पोलियो ग्रस्त बच्चों को गंधक के पानीमें नहलाते हुए नजर आए यह जगह छोटी सी जगह है जहाँ हम कुछ घंटे जरूर रुक सकते है चाय पानी नाश्ते का भी सुचारू रूप से इंतजाम है थोड़ी हस्तकलाकी चीजों की दूकान भी है एक बात हम अवश्य कहना चाहेंगे की हुन्नर और हस्तकला में हर राज्य की एक अपनी पहचान -विशेषता ऊभर कर सामने आती है ।

यहांसे तकरीबन ग्यारह किलोमीटर की दूरी पर उत्तरांचल की राजधानी देहरादून बसी हुई है यहाँ कई महत्व की संस्थाओं के मुख्यालय भी है जैसे की ongc ltd यहाँ का दून स्कूल जगविख्यात है जहाँ हमारे कई महानुभाव पढे हुए है हिमालय की गोद में बसा हुआ ये स्थल पर्यावरण के सुचारू रखरखाव की अच्छी मिसाल है हराभरा है ,प्रदूषण से मुक्त है यहाँ के चावल उसकी अनोखी खुशबू के कारण जगमशहूर है हिमालय में यह एक प्रवेशद्वार है यहांसे मसूरी जा सकते है ।

लेकिन मसूरी से पहले हम चलेंगे ऋषिकेश जो मेरी सबसे मनपसंद जगह भी है हमारी अगली मुलाक़ात में ..............

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