31 दिसम्बर 2011

साथ साथ चलकर !!!!

बहुत कुछ पाकर भी व्यथा क्यों है चेहरे पर ???
देखो बहुत कुछ खोकर भी खुश रह सकती है जिंदगी !!!!!
क्या खोया क्या पाया ये मत सोचो कभी ,
तुम्हारा खोना किसीका पाना था ,
किसीने कुछ खोया होगा जो तुमने पाया है !!!
बस एक नज़र देख लो मुड़कर
ये वक्तकी बहती लहर को ...
तुम्हे यहीं छोड़कर आगे निकल रही है जो !!!!
एक मुस्कराहट जो खिली है आने के लिए ,
उसे मत रोको अभी ,
आने वाले वक्त के लिए उसे बिखेर दो फिजाओंमें ....
कल फिर एक नया सपना देखना है
मुझे और तुम्हे !!!
साथ मिलकर ...साथ साथ बैठकर ...साथ साथ चलकर !!!!

30 दिसम्बर 2011

विश्वास है मेरे वहां लौटने का हरदम ......

ये जिंदगी वही है ,
चोला पुराना
फिर भी हर रोज नई की नई है ,
उसके हर दीवार ,हर कोने ,हर कमरे पर
मेरा नाम लिखा हुआ है ,
कुछ कहे कुछ अनकहे अफसाने लिखे हुए है ,
मेरी हंसीकी गूंज उसने कोनेमें सजाई है ,
मेरी अश्कोंकी बारिशको उसने तकियेमें छुपायी है ,
कमरेमें आज भी बहती हवाएं है ,पर मैं नहीं हूँ ,
कोनेमें मेरी तस्वीर लगी है बचपनकी ,पर मैं नहीं हूँ ,
दीवारोंमें मेरे हाथका वो स्पर्श आज भी ताज़ा है ,पर मैं नहीं हूँ ......
जिंदगीका ये मकान अब पुराना हो चूका है ,
पर महसूस करो तो ये आज भी यादोंसे जवाँ है .....
वहां हर दीवार पर हर कमरे में एक खिड़की है ,
जिसे में दोस्त कहती हूँ ,
वहांसे मैंने दुनियाका पहला तार्रुफ़ किया था ,
वही खिड़की जहाँसे मुझे दोस्तोंने हाथ हिलाया था ,
वो हर दोस्त जो खिड़कीसे होकर मेरे कमरेमें आते थे ,
मिलकर खूब धमालधूम मचाते थे ,
ये खिड़कियाँ मेरे वो दोस्त ही तो है
जो आज भी ताज़ी हवा और रौशनी बिखेर जाती है
तुम्हारी दोस्तीके हर पलको उजागर करती है ,
क्योंकि उन्हें विश्वास है मेरे वहां लौटने का हरदम ......

29 दिसम्बर 2011

एक इल्तजा लिए....

मुझे ये नहीं पता
ये दुनिया की रिवायत क्या है ???
क्या है प्यार और नफरत क्या है ???
क्या है अश्क है और हंसी क्या है ????
क्या है जीत और हार क्या है ???
क्या है नजदीकियां और दूरियां क्या है ???
क्या है कारवां और तन्हाई क्या है ???
क्या होती है दुश्मनी और दोस्ती क्या है ???
क्या होता है अपनापन और गैर होना क्या है ????
क्या होता है इज़हार और बेरुखी क्या है ???
क्या तुम बिना जीना है और तुम्हारा साथ क्या है ????
फिर भी तुमने समजा दिया मुझे ...
और सिर्फ एक ही बात समजमें आ गयी है .
की मेरी दुनिया तुम्हीसे शुरू होती है
और तुम्ही पर ख़तम होती है ........
बस तुम्हारी चाहत तुमसे दूर जाकर समजमें आई ,
एक इल्तजा लिए ,
लौट आओ ..एक बार !!!!!

28 दिसम्बर 2011

धोखा दे जाए .....

ये कमबख्त हंसी और अश्क दोनों ही धोखा  दे जाते है ,
छुपाना चाहे उसे तब ही बिना पूछे बहार आ जाते है ....
मुझे जब कहना होता है बहुत कुछ
तब ही कमबख्त लब्ज़ धोखा  दे जाते है ....
जब उसके मक़ाम पर पहुँचते है चलकर
तो ये कदम ही धोखा दे जाते है ........................
उनके दीदारका वक्त आता है ,सामना होते ही  उनसे  ,
हयासे जुकी पलकें धोखा दे जाती है ...
उनके छूते ही मेरी उँगलियोंको
ये दिलकी धड़कन भी धोखा दे जाती है ......
जब ये एहसास होता है की हम उनके सबसे करीब आ गए है ,
और फिर आन पड़ी ये दूरियां भी धोखा दे जाती है .......
बहुत कुछ कहे चुके है ,अब बिन कहे समज भी जाओ ,
दूरियां अब झेलना मुमकिन नहीं
ये न हो की लौटकर आओ तुम
और मेरी साँसे ही मेरे जीवनको धोखा दे जाए .....

27 दिसम्बर 2011

तेरे चले जाने के बाद ......

मैं किसीकी आँखका नूर बन गया ,
मैं किसीके दिलका करार बन गया ,
जब हम हुए हकीकतोंसे रूबरू ,
मैं किसीका टुटा हुआ ख्वाब बन गया ....
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शर्तोंसे प्यार करती हुई दुनियामें,
हम हार गए हर बाज़ी इस दुनिया की ,
क्योंकि हमने प्यारको पूजा समजा ,
हम खुदके घरका ठिकाना भूल गए ....
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नज्मोंमें कैद अल्फाज़ क्यों दर्दका सैलाब लाते है ???
एक किताबमें छुप इस दुनिया को रुलाते है ???
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वो तुम्हारे एहसास को समजी है दुनिया
जब तुम इस दुनिया को ही छोड़ गए ,
खुदको काबिल बना दिया तुमने खामोश रहकर
किसीके लिए तुम खुदा किसीके लिए काफ़िर बन गए ....
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इबादत ,बंदगी इस जिंदगीके लिए कैसे करें हम ???
मेरी जिंदगी तो किसीके पास रेहन पर पड़ी है ...
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गुस्ताखी तुम्हारी जिसकी सजा बस काटे हम ,
ये मेरी किस्मत मेरी रेखाओंने लिखी है तेरे चले जाने के बाद ......

26 दिसम्बर 2011

तुम ही !!!!!

सफे पर आड़ा  टेढ़ा रेखाओं को जोड़ना शुरू किया ,
एक तस्वीर बनने लगी है ....
कोरी हथेली पर स्याही लगती गयी थोड़ीसी ,
लगा मेरी तकदीरकी लकीरें बनने लगी है .......
थोडीसी स्याही चेहरे पर लगी ,
थोडीसी नाक पर भी लगी ,
गाल पर लाल रंग निशानी छोड़ गया ,
आँखके नीचे काला टीकासा रंग गया है ....
मैं तस्वीर बना रही थी तब
तब एक अजनबी अपने कैमरेमें मुझे कैद कर रहा था ...
जहाँ मेरे नए नए चेहरे कैद थे ...
जो तस्वीर मैंने बनायीं वो तो केवल एक थी ,
पर हर रेखाओ पर खिंची मेरी तस्वीर तो
कहीं हंसी थी ,
कहीं आश्चर्यम ही आश्चर्यम  था ,
कहीं थोडासा गुस्सा था ,
कहीं आँखें छलक रही थी ,
कहीं ख्वाबोंका घरौंदा था .......
मैं लगातार हंसती रही मेरी तस्वीर पर ही ,
कितने रंग छोड़कर गया वो मेरे लिए ,
छुपा रुस्तम था वो ,
जिसने बिना कहे जता दिया ,
खुबसूरत तस्वीर बनाता वो ही है ,
जिसका दिल खुबसूरत हो !!!
जिसे हर तस्वीरमें उतारा जा सके !!!
वो तुम ही हो.... तुमही हो..... तुम ही !!!!!

25 दिसम्बर 2011

थेंक यु सांता ...!!!!!!!

कल रात एक ख्वाब लेकर आया मेरा सांता क्लोज़ ,
मेरे मैले मौजेमें दो ख्वाब रखकर चला गया .....
एक किताब थी एक ख्वाबके लिबासमें ,
जिसके हर पन्ने पर मेरे ख्वाब सजेथे नज़्म बनकर ....
उसमे तस्वीरे भी लगी थी मेरे बचपनकी .....
उसमे धुंधलासा एक चेहरा भी था ,
उसके शीर्षककी जगह जिंदगी लिखा था .....
दुसरे सफे पर एक मोमबत्ती थी ,
और तीसरे सफे पर उस मोमबत्ती के उजालेमें वो चेहरा फिर था ....
दूसरी किताब कोरी थी ,
उसके साथ एक दवात जुडी थी ....
एक स्याहीकी भरी बोतल थी .....
सुबह उठकर मैंने आसमां को देखकर
जोरोंसे आवाज लगायी उस आखरी सितारेको जो अस्त होने जा रहा था .....
थेंक यु सांता ...!!!!!!!

23 दिसम्बर 2011

एक वीरानसा अरमानोंका कब्रस्तान !!!!!

वो शुरू होती है एक जिंदगी बनकर ,
एक जिंदगीके साथ ...
हर सांसकी बाहोंको थामकर चलती है ,
जिंदगी बनकर साथ ...
गिरती है -संभलती है ,
रोती है -हंसती है ,
जागती है -सोती है ,
गुनगुनाती है - चुपसी रहती है ,
खामोश है -बोलती है ,
उडानकी आसमें तकती आसमांको ,
आसमांसे जमीं को तरसती है ,
उसके ख्वाब पलते है पलकों पर ,
वो ख्वाबोंकी ताबीरको तरसती है ,
गिर जाता है कोई ख्वाब सुनहरा पलकसे ,
तो ख्वाबोंकी किरचोंके साथ टूटकर बिखरती है,
उसके हर ख्वाबका ख्वाबगाह एक दिल होता है ,
उस दिलके गुम जानेसे उसके ख्वाब गुम जाते है ......
आज ये इश्तिहार है ये :
मेरे ख्वाब गुम गए है ,
गर मिल जाए उसकी किरचें कभी ,
उसे मुझ तक पहुंचा देना .....
पता है :
एक वीरानसा अरमानोंका कब्रस्तान !!!!!

22 दिसम्बर 2011

एक अनदेखा अनजान चेहरा

एक अनदेखा अनजान चेहरा 


कोई चेहरा रोज आता है मेरे पास ,
बस आँख मूंदकर जब सोते है सिरहाने पर ...
वो गुमसुम आँखे नम सी ,
बस होठ लिए है मुस्कराहटके बहाने .....
मोटी मोटी आँखों में बहुतसे सवाल लिखे है ,
और वो नज़र मुझसे वो सारे जवाबतलब कर रही है .....
लगता है सदियोंकी पहचान है उस चेहरे से ,
पर कभी मेरे इर्दगिर्द नज़र आता ही नहीं .........
रोज आकर कहता है मुझे मैं तुम्हारी तलाश हूँ ,
एक दिन हमारा आमना सामना जरुर होगा ,
वो भीड़भाड़के बीच मुझे तुम्हे पहचानना होगा ....
उस वक्त बस एक पलभर आँख मूंद कर खोल देना ...
मेरा चेहरा तेरे सामने ही होगा ....
छूकर देख लेना मुझे की यही एक सच होगा ....
बस उस वक्त उस वक्त 
मेरी आंखोमे इन सवालोंकी जगह ,
हमारे मिलनका एक जवाब होगा ............
वो अनदेखा अनजान चेहरा कभी बदला नहीं है ,
उसने रातको मिलनेका वादा कभी तोडा नहीं है ,
फिर भी उस मिलन की घडी होगी कब ये कभी बताया नहीं है ,
मुझे उससे बेशुमार प्यार हो गया है पर
उसने अपने लबोंसे कभी इज़हार किया नहीं है .....
                                                           एक अनदेखा अनजान चेहरा 
जो मेरे जीवनकी वजह बन गया है ,
सुने पड़े दिलकी धड़कन बन गया है .....
पूछूँगा उसे मुझे पहचान तो लोगे न तुम भी ???
क्या मैं तुम्हारा सपना बनकर आया हूँ कभी ????

21 दिसम्बर 2011

एय नाज़नीं ये तुम्हारे नाम और ये कविता भी ....

मासूमियतने मुस्कुराना सिखाया था मुझे ,
आँखे कह रही थी ,
ये भाषा समज सको तो समज लो ...
मैंने कहा तुम जिंदगीसे बहुत प्यार करते हो ,
लेकिन जताना उस प्यारको बेकार समजते हो ,
क्योंकि जिंदगीको फुर्सत नहीं तुम्हारे प्यारको समजने की ,
क्योंकि ये जिंदगी शायद तुमसे ज्यादा तुम्हे प्यार करती है ........
आँखे फैलाकर तुम्हारे चेहरे पर एक तस्वीर बन गयी ,
तुमने समज लिया की  तुम्हारी चोरी को मैंने पकड़ ली .....
बस अब ये होठो पर रुकी हंसी को बहार तो आने दो ....
बिचारी अन्दर कसमसा रही है ..
उसे खुलकर फिजाओंमें उड़ने दो ..................
-ये कविता मेरे हाल ही में रखे ब्लॉगकी तस्वीर के लिए ....
एय नाज़नीं ये तुम्हारे नाम और ये कविता भी ....

20 दिसम्बर 2011

कल नाराज़ थी जिंदगी....

कल नाराज़ थी जिंदगी ,
बहुत शिकायत थी उसे मुझसे ,
रोते हुए मुझे शिकायत कर रही थी ,
अबे तू इतने दिन कहाँ खो गयी थी ???
मैंने हौलेसे मुस्कुरा दिया ,
और धीरेसे कहा ,
तुमने मुझे कितनी बार सताया ??
ये भी तो याद कर ले की कितनी बार रुलाया ???
मैंने ख़ामोशीकी चादर लपेटे हुए
तुम्हे तो ये कभी नहीं बताया ,
की तुने तो मुझे हरदम रुलाया !!!!
न शिकवा न शिकायत कभी की
सोचा तू किसी और के लिए मशरूफ रही होगी !!!
फिर भी आज जिंदगी तू दोस्त बनकर गले मिलने आई ,
तेरी शिकायतसे मैं थोडा गभराई.....
बस मेरी तरह बिना जिंदगी के जीना सिख ले ,
हंस न सके कभी तो चुपकेसे रोना सिख ले ,
अश्क कोई देख न सके तेरे इस लिए थोडा पर्दा करना सिख ले ,
शाम ढले जब तो जाते हुए एक झलक
मेरी और देखकर मुस्कुराना सिख ले .......
दोस्ती और प्यार ये तो खुदा की नियामत है
उसे आझमाना छोड़ दे ,
जो भी है तेरे पास उसे संभाल कर दिलमे रखना सिख ले .....

19 दिसम्बर 2011

चले थे तन्हाईकी ठोस तलाशमें ...

वतनकी गलीसे गुजरना आसान नहीं हुआ कभी
चले थे तन्हाईकी ठोस तलाशमें ,
यादें बस हमारी हमकदम बनकर साथ ही चलती रही ,
लोगोको दिखे हम अकेले चल रहे है .......
कच्ची सड़कें अब कोंक्रिट रोडमें तब्दील हो चुकी थी ,
फ्लाईओवरसे गुजरकर वर्तमान हमारे ऊपरसे गुजरता रहा ....
फिर भी हम जिन्दा ही जिन्दा रहे और न यादें मरी .....
कुछ तलाशथी जिन चेहरोंकी ,
वो नज़र नहीं आये ....
तो ...
कोरी सड़क पर अश्ककी एक बूंदसे एक पाती लिख आई ,
इसी आस में की वो भी जब गुजरे कभी इस सड़क से
उन्हें भी हमारा ये पैगाम मिल जाए ,
किसने कहा हम जुदा हो गए है ,
आज भी तुम्हारी यादोंका गुलशन ताज़ी खुशबू बिखेर रही फिजामें ,
आज भी तुम मेरे साथ खेल रहे हो ...
आज भी तुम मेरे साथ झगड़ पड़े हो ....
आज भी तुमने मुझे आंसू दिए है ,
आज भी उस रुमालसे मैंने उसे पोछा है ....
न जुदा हुए कभी
न कभी जुदा हो पाएंगे ....
हम तुम इसी सड़क पर कभी फिर साथ चलेंगे
इसी आसमें मरते दम तक जी जायेंगे ...... 

14 दिसम्बर 2011

प्यारके एहसासकी पहचानसी ...!!!!!

जिस दिन प्यारको समज गए
प्यार करना ही भूल गए ....
समजनेमें हर लम्हा गुजरता गया ...
और प्यार रूठकर लौट गया !!!!
जो हर दर्द हर ख़ुशीसे परे हो
उसे प्यार कहते है ...
जब गम और ख़ुशी तुम्हारे साथ रहने लगे ,
प्यारके लिए जगह कम हो जाती है ....
वो तो बहती हवा का झोंका है ,
उसे दिलकी सरहदें कहाँ रास आती है ????
उसका वास्ता तो आसमाँसे है ,
उसे दो गज जमींकी मोहताजी कहाँ ????
दो धडकनोंके बीच जो पूल बना है ,
वो उसका इबादतखाना है .....
बस ढूंढते रहे हर दम किसीकी आँखोंमें
किसीकी बातोंमें ,किसीके अश्क में या किसीकी हंसीमें !!!
प्यारने कभी ये तो बताया ही नहीं
की उसका ठिकाना कहाँ है !!!
हमेशा आधा अधुरा सा ही नज़र आया है
हर कोनेमें जाकर देख लो !!!!!
आँखोंको मींचकर देखा तो एक तस्वीर उभरकर आई है
दिलकी दीवारों पर तराशी हुई है चुपकेसे ,
शायद ये प्यार नहीं लगी ये प्यारके एहसासकी पहचानसी ...!!!!!

13 दिसम्बर 2011

तुम बिन !!!!

तुम बिन दिल क्या करे ?
तुम बिन दिल क्या कहे ?
तुम बिन बेजुबाँसे ये अल्फाज़ !!!
तुम बिन कोरे कोरेसे बिखरे हर रंग !!!
तुम बिन कौन सुने मेरी बेमतलबकी बातें ???
तुम बिन कौन मेरी तारीफ वाला वो नगमा गुनगुनाये ????
तुम बिन बादल चिढ़ाकर उड़ जाए !!!
तुम बिन बरसात भी मुझे कोरा छोड़ जाए !!!
तुम बिन हर रात नींद आना क्यों भूल जाती है ???
तुम बिन हर दिन क्यों घसीटता चले जाता है ????
तुम बिन फीका लगे वो खास पकवान भी !!
तुम बिन जलमें रहकर भी जिन्दा रहे हर प्यास !!!
तुम बिन कौन एहसास दे की मैं हूँ जिन्दा ???
तुम बिन कौन मेरी आहट पर चौंक जाए ???
तुम बिन मैं क्या तुम बिन ???
तुमसे शायद मैं हूँ न हो मुझसे तुम !!!!!
जो लिखना भूल गयी ,
उसे कौन पहचानेगा ???
तुम बिन !!!!

12 दिसम्बर 2011

खुदसे दूर खुद से खफा होकर ...

खुदसे दूर खुद से खफा होकर 
बहुत दूर जा चुके है हम अब इस दुनियासे ,
ये होता है खुदके साथ जब सोच वक्तसे आगे चली जाती है ,
और जो कहा हमने वो एक अरसेके बाद कोई समजता है .....
बहुत देर कर देते है जब किसीको समजनेमें 
हो सकता है जब आता है समज 
नाम मेरा  कहीं दूर आसमानोंमें खो चूका होता है ......
एक वो चमकते सितारेको देखकर याद आती है 
वो सारी बातें जो मैंने कही थी कभी 
मतलब इतना सरल और सहज होगा ये उसे पता न था ,
शायद अब समज पाए हो जब 
जो सबसे अज़ीज़ पल था हमारे जीवनके 
उन हर पल के साथ सिर्फ मेरा  ही नाम जुड़ा था .....
अब इल्तजा करते है हमें 
इन सितारोंसे पयगाम भी हम पाते है 
ये पता तुम्हारा हम आसमानों पर लिखा पाता है 
ये कहते हुए कि फिर हमारी दुनियामें एक बार लौट आओ ............

11 दिसम्बर 2011

सितारोंको गिना था ,

कल अधखुली आँखोंसे सितारोंको गिना था ,
एक सितारा दुसरेसे पूछ रहा था ,
आज चाँद लाल क्यों है ???
तो कहा हँसते हुए धरतीने
आज उसकी मिलन रात है उसके पिया सूरजसे ,
मौनकी शहनाईके सुर सुनो ,
बस आज आँखे मूंदकर उनकी ख़ुशीको अश्कके फूल चढाओ............
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ये कहानी है प्यारकी ,
जो हर युगमे तनहा रहा है ,
लोग कहते है दिलमे बसता है ,
और धड़कन बन जाता है ,
फिर क्यों धड़कन रुक जाने पर भी
प्यारकी दास्ताँ जिन्दा रह जाती है ???

9 दिसम्बर 2011

बेहद खुश ........

दूर दूरसे काले साए चले आ रहे थे ,
लगता था बहुत बड़ा हुजूम है ,
मुझे लगा इसे चीरकर जाना है ,
अंधकार और उजालेके बीच भी जंग छिड़ गयी थी ,
अँधेरा धक्के देखर उजालेको बाहर कर रहा था ,
उजालेको भी जिद्द थी वो न हटेगा पीछे कभी ,
काले काले साए लम्बी सड़क पर चले आ रहे थे .....
पीछेसे चली आ रही थी कारें लगातार ...
उनसे पता चलता था की ये साए लगातार कहीं जा रहे थे ....
बस चलते गए यूँ लगातार ,
एक दो एक दो करके साए पाससे गुजर जाते थे ,
और मेरे अंतिम पड़ाव पर हर साए से परे ,
वो ही अकेली सी मैं ,
सड़कके किनारे बैठी हुई ,
देख रही थी अँधेरेकी हार और उजालेकी जीतको ...
मुस्कुराकर हर साए को चीर हम दोनोंही खुश थे ....
बेहद खुश ........

7 दिसम्बर 2011

जिंदगी एक अजीब दास्ताँ है ...

जिंदगी एक अजीब दास्ताँ है ...कब कहाँ किस मोड़ पर लेकर जाए पता ही नहीं चलता ......जब सब कुछ मनमुताबिक ठीकठाक चल रहा हो तो एक छुपा हुआ डर सामने आता है ,कहीं कुछ बुरा तो नहीं होगा न ??!! ये शंका बहुत ही गहरी चीज है ..और कभी सच हो तो ये वहम हो जाती है ....एक जैसी गुजरती जिंदगीसे बोर हो जाना भी लाज़मी है ...परिवर्तन उस वक्त हमें चाहिए होता है जो मिलता नहीं ..और जब कोई परिवर्तन होता है तो हम तैयार नहीं होते उसके लिए .....
जब अचानक कुछ बड़ा बदलाव आये तो मैं उसे हंसकर स्वीकार करती हूँ ....मुझे शंका कम ही होती है ...स्थिति नयी होती है इस लिए सफलता और विफलताका डर भी नहीं होता ....प्रवाह से अलग पगडण्डी पर चलना मेरा एक शौक है ...क्योंकि वहां पर एक नयापन होता है ....
हम मनुष्य पहले हमें हर बातमे कुछ मुनाफा है या नहीं ये पहले सोचते है उसके बाद हम देखते है की इस राह पर कितनी कम मुश्किल आएगी ...उसके बाद निरिक्षण करेंगे की उस राह पर चलने वालोंके साथ क्या क्या होता है ??? उनकी राय भी जानेंगे ...फिर कदम बढ़ाएंगे .....इतनी देर लगानेमें उस चीजमें जो आकर्षण होता है वो समाप्त हो जाता है ...जिंदगी का साहससे जूझनेकी ताकतका ह्रास हो जाता है ....फिर भी एक चैन की सांस लेते है हाश हमने कुछ खोया नहीं ......
किसीभी जाने पहचाने रस्तेमें भी अनजान और आकस्मिक मुश्किलें भी तो आती है पर उन्हें औरोंके अनुभव और सलाहसे दूर करने की कोशिश करते है ...
कभी कभी हमारी पसंदकी राह हमारे परिवार को पसंद नहीं आती ...एक प्रचंड विरोध भी उठता है ...और हमारा परिवारके प्रति प्रेम और उनसे जुडी संवेदना के कारण हम किसी भी बड़े बलिदान देते हुए नहीं हिचकिचाते ...हमें एक संतुष्टि मिलती है की हमने हमारा कर्तव्य अच्छी तरह निभाया ....
पर यहाँ पर एक सवाल आता है मेरे जहनमें :
क्या हम बिना बलिदान दिए सबको भी राजी करके अपनी इच्छा पूरी हो इस तरह कोई प्रयत्न क्यों नहीं कर सकते ??क्यों ऐसा नहीं सोच सकते ??? क्यों हम किसीकी सोच बदलकर उसे अपनी सोच समजानेकी कोशिश क्यों नहीं करते ??? हम भी इस दुनियामें एक अलग व्यक्ति है और ये जरुरी नहीं की हर बार हमारी सही बातको भी दबा दिया जाय तो हम झुक ही जाए !!!! ये सब हम पर निर्भर करता है ...और यहीं पर इंसान की काबिलियतकी परीक्षा होती है .....
हमारे आइन्स्टाइन ,न्यूटन जैसे वैज्ञानिक , खलील जिब्रान और सोक्रेटिस जैसे महान चिंतकोको उनके युगके लोगोने पहले गलत ही करार दिया था ...पर गुजरते हुए वक्तने ये साबित किया की हां वो सही थे ......ट्रेनके डिब्बे से एक सुनसान स्टेशन पर सामानके साथ मिस्टर गाँधी को दक्षिण आफ्रिकामें बहार फेंका गया था ...पर उनकी हिम्मतने पुरे गुलाम भारतको आज़ाद करवाया और आज भी लोगोके उनकी निति और विचारधारामें अपार श्रध्दा है ........क्योंकि अपनी सही बात साबित करनेके लिए उन्होंने कौन साथ है या नहीं उसकी परवाह नहीं की ...एक अकेला आगे बढ़ा नयी सोच के साथ  और कारवां बनता चला गया ............
बस मुझे गूंगे समर्पणमें विश्वास नहीं जब हमारी बात सही हो ...मैं कभी डिगनेमें विश्वास नहीं करती ...जहाँ तक हो सके अपनी स्थितिसे लडती हूँ बिना घुटने टेके ...और इसी लिए मेरे साथ वाले लोग भी जानते है की सोच समजकर जो कुछ करती हूँ इसके लिए मैं हार नहीं मानूंगी और विरोधकी मात्रा कम होने लगती है ...कभी आज़माकर देखना ...सफलता आपके कदम चूमेगी ...

6 दिसम्बर 2011

खुदके साएको हमसफ़र बनाकर.....

लगता था आगे एक मजबूत दीवार है ,
देखा तो कोहरेका कमाल था धुपके आने से ढह गयी ......
न नज़र आये आगेकी राहें तो रुकना मेरी फितरत नहीं ,
दीवार होगी तो टकराकर लौट जायेंगे ,
कोहरा होगा तो चीरकर राहोसे गुजर जायेंगे ......
मंज़र चलते हुए नहीं बदलते कभी
बदलती गयी सोचने नज़र बदल दी ,
देखो हम अच्छेसे बेहतर बनते चले जायेंगे .....
गहरी खाई इस बातकी गवाह है ,
कल जहाँ थे कदम हमारे
आज तो हम उससे भी ऊंचाई पर है ....
ऊपर दिखते हुए हर शिखर पर है लिखा हुआ
देखो रुक मत जाना थोडा ठहर भी लो तो ,
मंजिल तुम्हारी तो इस ऊंचाईओ पर है ...........
राहें थकती नहीं ,कदम थक जाते है ,
वो हौसलोंकी हवाएं छूकर गुजर रही है ,
खुदके साएको हमसफ़र बनाकर हम गुजर जाते है ........

5 दिसम्बर 2011

मुक़र्रर करके आये थे...

जिस पल इस हंसी दुनियामें आँख खोली हमने 
उस पल मुक़र्रर करके आये थे तारीख अपने मौतकी ......
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जिंदगीको सालोंकी लम्बाईसे नापी नहीं कभी ,
बस उन हर लम्होंसे जिन्दा हूँ अभी भी 
जब किसीको मुस्कराहट दे चले हम .......
अपने मौतके बाद भी ......
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कहाँ कहाँसे गुजर गए थे तेरे इश्कमें 
कभी बहारकी बयारोंसे कभी खाक ए रेगिस्तानमें ....
जहाँ जहाँ कदमके निशान पड़े थे मेरे 
आज भी तुम्हारे मेरे इश्ककी दास्ताँ कायम है .....
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न उफ़ कहा ..न अश्क बहाया ....
तेरी कसम निभाने हमने हर ज़ख्मको सहलाया ....
बस ये ही प्यारकी रिवायत है की 
पाकर नहीं खोकर वो याद आता है हर लम्हे हर सांस पर .....

4 दिसम्बर 2011

वो मुकम्मल घरौंदा.....

एक हंसी कायनात सजती है जिसके लिए
वो मुकम्मल घरौंदा एक डाली पर बैठा .....
चिड़ियोंकी फुसफुसाहट सुनता रहा ,
अब हमें पंख कब आयेंगे ???? उड़नेकी ख्वाहिश हमें ???
तब डाली हंस पड़ी
देखो मुझे तुम्हारे खाली घरौंदेको भी संभालकर रख लेती हूँ ,
बस येही आस लिए ,
एक दिन लौटेगा कोई पंछी यहाँ
जब परवाजोंसे वो थककर
दो घडी विश्रामकी आस भर यहाँ रुक जाएगा !!!!!
नहीं आता कोई जब
हवाकी लहरोंको कहती हूँ
ले जा ये घरौंदा उस पंछी के लिए
जिसके अन्डोमेंसे मैंने उसे बहार निकलते देखा था ..........
जब थक जाए अपने सिरहाने मीठी नींद सुला देना .....

2 दिसम्बर 2011

वादा मेरा ....

बहुत तफतीशके बाद किसीकी तक़दीर लिखने चली ,
अँधेरा घना था ,कागज़ कोरा था और कोरा ही रहा ,
ये न पता चला की बिन स्याहीकी कलमसे
मैं चुपचाप एक सफे पर झख्म बनाने चली थी .......
सिसकते सफे पर एक खामोश दास्ताँ
पुकारते हुए बुलाने लगी मुझे ,
मेरी तक़दीर तो तुम लिख चुकी ....
तुम्हारा और मेरा प्यार बस यूँही खामोश
सोया रहेगा यहाँ ,
बस ये जहाँ
सिर्फ मैं तुम और हमारे जज्बात .....
जरुरी नहीं इसे दुनिया देखे या न देखे ......
कभी जो बह गया कोई धारा में ...
कभी कोई फाड़ कर चला गया ....
कभी कोई उसपर लिख देगा स्याही से ....
फिर भी ये तेरी लिखी तक़दीर
उसे वो मिटा न पायेगा ....
वादा मेरा ....
मैं तुम्हे न भूल पाऊंगा ....
और जानता हूँ तुम्हारे दिलमें लिखा ये कोरा कागज़ मेरे नाम !!!!!!

1 दिसम्बर 2011

रुक गया वो कारवां ....

बिखरते सिमटते पत्तोंके बीचसे एक बार
बहारने झाँका चुपके से और गुल मुस्कुराया ......
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सिमटे अल्फाजोंको तरन्नुममें पिरोनेकी एक कोशिश
और देखो ये  दिल छूने वाली टूटे दिलकी दास्ताँ बन गयी .....
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संगीतके हर सुरको छूकर गुजर गए हम ,
फिर भी एक दर्द बेठा था नज़्म बनकर सिसकता हुआ !!!!
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कोई उम्मीद कहीं खलिश बनकर चुभ सी गयी ,
और एक टीस मेरी फिर एक नज़्म बनकर निखर गयी !!!!
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एक वादेको निभाने कई वादे तोड़ दिए तेरे प्यार में
और देखो बेवफाई का इलज़ाम भी तुम्हीसे तोहफेमें ??!!
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मेरा सफ़र तो सात सुरोंके बीच गुनगुना रहा था कोई नगमा
हवा भी थम सी गयी थी और फिजा झुमने लगी, रुक गया वो कारवां ....