30 जुलाई 2011

कब लौटोगे ???

वक्त के सितमको क्या कहें ???


हसीं ख्वाब दिखाकर छोड़ जाता है ,


हम दो राहे पर खड़े उसके इंतज़ारके लम्होंको


सहजते हुए बस इतना ही कहते है ,


कब लौटोगे ???


कहाँ पर मिलोगे ???


कैसा रूप होगा तुम्हारा रूप ???


तुम मुझे कैसे पहचानोगे ??


बस सवाल पर सवाल लिखते चले जाते है हम ,


और वक्त चुपके से जवाब लिखकर चला जाता है जिंदगीकी किताब पर ......


29 जुलाई 2011

बस इतनी सी तो ...

एक पगडण्डीकी राह पर


चलते चलते एक दिन


अचानक जिंदगी मिल गयी सारे राह ........


नंगे पांव चलते हुए


थोड़ीसी गर्द जमी हुई है ,


काँटोंसे थोड़े झख्म बन गए है ....


पर ध्यान चला जाता है उस फुल पर


जो हंस रहा है तितलियोंके साथ ....


दर्द छुप जाता है उस तितलीके लिबासमें


उड़ता फिरता है फुल की खुशबूके संग ......


कहाँ छुप गयी थी अब तक ???


अय जिंदगी .....


तुझे हर द्वारे पर ढूंढकर थक गए हम ,


जहाँ किश्तोंमें उधार पर भी मिलती थी .....


और अब पाया है तुझे सुनसान गली में


यूँ तनहा सी हँसते हुए ....


रख ले मुझे अपने दामनमें छुपाकर ...


बस इतनी सी तो इल्तजा है .....

गुलमहोर .....

एक रास्ता है ,


दोनों तरफ पेड़ गुलमहोरकी कतारें .....


थोड़ीसी धुप छन करके आती है ,


थोड़ीसी छाँव है ...


वो धुपकी किरन खड़ी है छाँवकी बाहोंमें ......


नीचे मैं ....


अनायास ही खड़ा ये खेल देखता हुआ ...


हाथमें एक टूटी हुई गुलमहोरकी डाली सहलाते हुए .......

28 जुलाई 2011

उधार साँसे .....

जीने के लिए चंद साँसोंको उधार दे दो ....


आज हर एहसानको मेरे नाम कर दो ...


क्यों कोई गुमनाम होकर जिए खुदसे ,


आज मेरा नाम मेरे नाम कर दो .....


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तेरी तस्वीर लेकर घूमते रहे ,


हर चेहरेमें तेरा चेहरा ढूंढते रहे ,


हर शक्लमें तेरी शक्ल नजर आई मगर ,


ये तुम नहीं थी इस पर ऐतबार करते रहे .......

27 जुलाई 2011

इश्क ...

रोक लो बढ़ते कदमको


आगे ढलान है या फिसलन ???


ये बारिश का मौसम है और आगे मिटटीके ढेर


रोक लो बढ़ते कदमको ....


नंगे पांव ये छोड़ जायेंगे निशाँ गीली मिटटी बनकर ....


याद रह जायेंगे जब सूखेंगे ....


वो निशाँ तुम्हारी हयातकी आखरी निशानी है ,


संभालकर रख लेते है उसे आँखोंमें कैद करके ....


तुम्हारी यादों की वफ़ा पर हमें नाज़ है


तुम्हारी तरह हमें वो तनहा छोड़कर गयी नहीं ...


फक्र होता है अपने इश्क पर ....


रश्क होगा खुदा को भी की


हमें दिल देकर नवाजिश कर दी ...


जीने की इजाजत तो दी ...

26 जुलाई 2011

ख़ामोशी बस ख़ामोशी ...

हम खामोश है और रहेंगे


क्योंकि हम रुसवा नहीं कर सकते


अपनी जुबाँसे आपको ,


गिले शिकवे तो हर दोस्तीका उसूल है ,


पर आपकी अच्छाईसे दोस्ती हमारी रोशन थी ,


आज भी आपकी यादें साथ है हमारे ,


हम खुदकी नज़रमें गिरे कैसे ?


गर तुम्हारे खिलाफ लब्ज़ निकाला


तो वो रुसवाई हमारे विश्वास की है ......


तुम खफा सही मुझसे नजदीक नहीं ,


गर तुम्हारी नफ़रतमें है वो दम


ले जाओ तुम्हारी यादोंको मेरे दिलसे निकालकर ,


वो भी तुम्हारे साथ आनेसे इनकार कर देगी ....

24 जुलाई 2011

देखे !!!!!

चलो आज इस राह अकेले ही चलकर देखे ,
तनहाईके इस मंज़रसे अकेले ही गुजरकर देखे ,
गुमशुदा होने के लिए नयी डगर चलकर देखे ,
भीड़में जब मिले तनहाई तो
तनहाईमें खुदके साथ चलकर देखें ?????
क्यों करें किसीसे उम्मीद हमारा हाथ पकड़कर साथ चले !!!
चलो हम भी किसीका दामन थाम
उसका सहारा बनकर देखे !!!!
कहते है बहुत गहरे होते है ख़ामोशीके अँधेरे ,
चलो आज उसमे तुमको तलाशकर देखे !!!
आँखोंके आगे आती रही हरदम तस्वीर उसीकी ,
चलो आज उससे नज़र मिलाकर तो देखे !!!!
जिसके बगैर जीना हो ना गवारा ,
उसे जाते हुए रोकनेके लिए आवाज लगाकर देखें !!!!

23 जुलाई 2011

एक कब्र ...

सतरंगी बारिशकी चुनर श्यामा हो गयी ,


क्या कहें क्या रहा होगा तुम्हारा नज़रे करम !!!


मेरी हर ख्वाहिश दबी हुई फिर जवां हो गयी ,


एक गरीबके नसीब पर सारी कायनात मेहरबां हो गयी !!!!!!


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ना सोचा था ये भी होगा प्यारमें कभी


आरजूके सारे दरीचे इश्ककी कब्र पर


कफ़न बनकर सज जायेंगे हमारी ,


वो हमें जिन्दा गाढकर दफ़न कर जायेंगे !!!!!


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इस ठोकरने सिखाया हमें ,


गैर तो गैर ही रहेंगे हमारे ना हो पाएंगे ,


आपकी हर वफ़ाकी कीमत


सारे जहाँकी दीवारों पर


हमें बेवफा करार कर दिया ....


हमें रुसवा करके सरे बाज़ार नीलाम कर दिया .....


फिर भी शुक्रिया आपका ,


तुम्हारे दिलमें नफ़रत और हमारे दिलमें प्यार बनकर


इश्कका नाम ऊँचा कर दिया ........

22 जुलाई 2011

तेरा पता .....

ढूँढने पर भी मिला नहीं कहीं तु
अय खुदा तेरा पता जो लिखा था ....
चंद मंदिर ,मस्जिद ,गिरजा ,गुरुद्वारेमें ढूँढा ,
मिला वहां हमें जो कभी सोचा ना था ..........

21 जुलाई 2011

ये भी रस्मे होगी वफ़ाकी ये मालूम ना था ...!!!!

आज जाने हमने जाने क्या है जिंदगीके मायने ,

अजनबी लगते है अक्स खुदके है फिर भी अपने ही आयने ......

एक हलकीसी दरार बना देती है एक खाई ,

अपनी थी कल तक वो हर चीज़ हो चुकी पराई .......

वफ़ादारीकी हर रस्म निभाने की खाई थी जिसने कस्म,

आज वही भूलने लगे है वफ़ा की हर रस्म ......

न किया था दावा की जिंदगीभर का है हमारा साथ ,

फिर भी ये वादा करके थामा था हमारा हाथ ,

न बदले हम , न हमारी रस्म ,न टूटी कोई कस्म ,

फिर भी लग रहे है आज वादाखिलाफी के हम पर न जाने इलजाम ...

ये नया जमाना है ,इस दिखावे नए है रंग ढंग ,

यूज एंड थ्रो का जमाना है , चाहे चीजें हो या इंसान ....

20 जुलाई 2011

हवा कुछ बोली ...

एक हवाके झोंकेने आकर कुछ कहा ....

जुबां थी उसकी सर्रर्र सर्रर्र सर्रर्र ..........

बूंदोंने उसके साथ आकर कहा .....

जुबां थी टिप टिप टिप टिप ........

बिजलीने कहा फिर चमक कर

गुर्रर्र गुर्रर्र गुर्रर्र गुर्रर्र ......

मुझे तलाशथी उसने आकर मेरे कानमें कहा .....

मुझे तुमसे प्यार हो गया है ,

क्योंकि मौसम बरसती है मेरे जहनमें तेरा दीदार बनकर ,

तुम जब साथ होती हो तो

भीना भीना एहसास भी है मेरे साथ है यूँ बरसात बनकर ....


18 जुलाई 2011

इल्तजा ...

हर नफस तेरी यादोंके दायरे सिमट रहे है ,

लगता है तेरे मिलने का लम्हा करीब है ,

इंतज़ारकी घड़ियाँ कहीं पीछे छुट रही थी ,

और दीदार करीब है ,

तू नहीं तेरी तस्वीरसे दिल यूँ बहलाया ,

जैसे खामोशसे लम्होंको तेरी बातोंने भर दिया ,

मेरी जिंदगीके कुछ लम्होंके खाने को खाली रहने दो ,

कभी खलिशको भी तुम्हारी जगह भरने दो .....

तुम्हारे बगैर हर लम्हे को कैसे जिया है ???

बस उसे लब्जोमे सजाकर सफो को भरने की इजाजत दे दो ,

मेरे लबों पर आकर रुक जाती वो शिकायतोंको उजागर होने दो ....


17 जुलाई 2011

आज फिर एक बार ...

आज एक झोंका आया तेज हवा का और सब कुछ उड़ाकर ले चला ,

मेरी यादोंके सारे बवंडर ,उसके पहलुमें उड़ गए ,

चलो आज फिर जिंदगी हलकी फुलकी सी हो गयी ,

चलो आज फिर जिंदगीके नए मौजू की तलाश शुरू हो गयी .....

मुमकिन है ये मुश्किल नहीं मेरे लिए ,

ढह गए अरमानोंके खंडहर को कई बार फिर संवारा है मैंने ,

शायद उसके बनने पर खुद की चुक नज़र आ गयी कहीं पर ,

खुदके हाथोंसे गिराकर फिर नयी तस्वीर उभारी हमने ............


16 जुलाई 2011

और मैं .........

कल एक ख़त आया ...एक पुराना दोस्त था ....कई सालसे गुमशुदा था ...ना ना आप गलत सोच रहे थे ...मेरी फ्रेंड लिस्टमें गुमसा था ...मैंने उसे कोई दुःख नहीं पहुँचाया था पर उसे मेरी कोई बात बुरी लग गयी इस लिए वो खुद ही मुझसे दूर चला गया होगा ...आई थिंक सो .......क्या करूँ मेरी मुफलिसीके दिन थे तब वो मेरा गहरा दोस्त था ...पर मेरी किस्मतसे ज्यादा मेरी मेहनतने मेरा साथ दिया और मैं मेरा सपना सच होता देख पाया ....हाँ मैं एक रंगमंच का कलाकार हूँ .....बेहद कामियाब ....अब मेरे नाम के चर्चे नाट्यमंच पर टॉप ब्रेकेटमें होने लगे है ....मैं लोगोसे घिरा रहता हूँ .....मुझे अपने परिवारके लिए वक्त नहीं मिलता पर मैं एक दिन निकाल ही लेता हूँ ....हा मैंने एक दिन एक काम किया ...मेरे लिए जो गैर जरुरी लोग थे उनको खुद से दूर कर दिया ...उन्हें इतनी बुरी तरह से इग्नोर किया की वो लोग खुद इस अपमानसे दुखी होकर खुद ब खुद दूर चले गए ....

ये लोगमें कुछ ऐसे मुफलिस भी थे जो शायद मेरे नजदीक रहे तो मेरी इमेज पर असर होता था .....अब तो मेरा जन्मदिन मेरे घर के लोगोसे ज्यादा मेरे प्रशंसक लोग अति उत्साहसे मनाते थे .....कितने महेंगे तोहफे , कितने सारे गुलदस्ते ...अब तो शहर के बड़े होटल मुझे बतौर मेहमान बुलाने के लिए कतार लगाते थे ....एक बहुत ही आला लाइफ स्टाइल हो चुकी थी ...जीने का मजा आता था ...अब तो मैं फिल्मोके लिए भी बुलाया जाने लगा हूँ ...वो दिन दूर नहीं की हिंदुस्तान के हर छोटे बड़े शहरमें मेरे बड़े बड़े पोस्टर लगे होंगे .....

लेकिन ये ख़त ...ये दोस्त ...लगता है उसे मेरा कोई काम होगा .....इसी लिए लिखा होगा ...चलो एक चेक साइन करके रख दिया ...उसे जितनी जरुरत होगी उतनी रकम भर देंगे सोच कर तैयार कर दिया .........अब लिफाफा खोला ......कैसे हो ??? मैं सिर्फ पॉँच मिनट के लिए तुमसे ...ना नहीं आपसे मिलना चाहता हूँ .....9926247596 इस मोबाइल नंबर पर फोन करके जगह बता देना ...मैं सिर्फ ये शाम के पॉँच बजे तक ही शहरमें हूँ ..............

मैंने नंबर डायल किया ....हेलो ...श्याम ...कैसे हो ???

अच्छा हूँ ...सामने से जवाब आया .....

बोलो क्या काम है ??? मैं तुम्हे शाम रोयल बेंक्वेट होटलके रेस्तोरांमें मिलूँगा ....हाँ फिकर मत करना बिल मैं चूका दूंगा ...आज की शाम का आधा घंटा तुम्हारे नाम .........

शाम पॉँच बजे ...

रोयल बेंक्वेट के बाहर एक मर्सिडीज़ आकर खड़ी हो गयी ....

उसमेसे एक सूट बूटमें सज्ज सज्जन ....साथ में सात साल का बच्चा था .......

थोड़ी देर में एक टोयोटा गाड़ी आई जिसमे से अभिनेता उतरे ....

उसने इधर उधर देखा ...कोई नज़र नहीं आया ...तब होटल का दरवान उसे बुलाने आया ...आप जिसका इंतजार कर रहे है वो अन्दर है ....अपने कपडे और बाल ठीक करके ये जनाब अन्दर गए .....

सामने खड़े श्याम को देखकर ये हक्के बक्के हो गए ...थोडा सा बौखलाकर हाथ मिलाया .....श्यामने उसके हाथ में एक लिफाफा दिया ...और कहा :

यार , मुझे आगे पढना था पर मेरा वक्त बुरा था ...तब तुमने मुझे दस हजार रूपये दिये थे ...उसीकी मददसे मैं आगे पढ़ पाया ...स्पेस रिसर्च के लिए स्कोलरशिप मिली ...अमेरिका के सबसे अच्छे शैक्षणिक sansनासामें काम कर रहा हूँ ......इस साल मुझे अवकाश क्षेत्रमें विशिष्ट संशोधनके लिए नोबेल पुरस्कारसे सम्मानित किया गया ...ये उसका निमंत्रण पत्र है ...और ये लिफाफा है ...उसमे एक ब्लेंक चेक है ....उसमे एक रकम भरकर तुम पहले की तरह उसे मदद करना जो मेरी तरह वक्त का मारा हो ...तुम्हारे हाथमें मिडास टच है ...जिसे छू लेगा वो आस्मां छू लेगा ....


बाय कहकर वो थोडा आगे गया ... बेटे को गाडी में बिठाया ...पर फिर कुछ याद आया हो वैसे श्याम फिर इस जनाब के पास लौट कर आये और एक तस्वीर उसे दिखाकर बोले और हां ये मेरी धर्म पत्नी है ......आत्महत्या करने जा रही थी ...क्योंकि ये बिनब्याही माँ बननेवाली थी ...उसने तुम्हारा नाम बताया ...उसे ये नहीं पता था की तुम मेरे दोस्त हो ....पर मैंने उससे शादी कर ली ...ये बेटा तेरा ही ही जिसे मैंने अपना नाम दिया ......

बाय कहकर वो श्याम चला गया ........

और मैं .........

14 जुलाई 2011

जिंदगी और मौत

पेट्रोल महँगा ,अनाज महँगा ,गेस महेंगी , हर चीज महेंगी .......

तो फिर सस्ता क्या है ?????

महज इंसान की जिंदगी ..................

यहाँ कुदरती मौत मरना महँगा हो गया है ,

गर हादसों ,दुर्घटनामें होती है मौत तो मुआवजा तो मिलता है .........

जिन्दा इंसानकी कहाँ कीमत होती है यारो ???

अब तो मरने पर एल आई सीकी रकम की अदायगी होती है .......

जिन्दा इंसान घसीटकर जीता है जिंदगी ,

उसे घसीटने पर मजबूर करने वालो की सात पीढ़ी तर जाती है ........

पीढ़ीका व्यापारी तो मरनेके बाद कुछ न दे चाहे ,

बम विस्फोटमें या फिर रेल दुर्घटना हो या बाढ़ पीड़ित

मरनेवालेकी कीमत पांच लाख तय होती है ..........

अब तो सोच आती है ये

की जिंदगी कीमती है या मौत ?????

जो हमारी जिंदगीकी बागडोर वहशी दरिंदोके हाथ दे जाती है ???????


13 जुलाई 2011

एहसासकी चुनर पर

आज एहसासकी चुनर पर झख्मोके दाग मिटा दीजिये ......

नया सर्फ़ एक्सेल तो इस्तमाल कीजिये .....

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कोई तुम्हारे नयनोमें झाँखने की कोशिश कर रहा है ,

हमारे रे बेन के सन ग्लास तो इस्तमाल कीजिये .....

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तुम्हारे दिल को चलो आज बहलाते है ,

पिज़ा हट में जाकर मोहनलाल की चाय पिलाते है ......

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तुम्हारे गुस्सेकी लाली कुछ ऐसे हश्र कर गयी ,

मेरे हाथमे न जाने कब ९०० एम् एल की आइस क्रीम खाली हो गयी ....

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क्यों तडपाते हो हमें इस कदर सुबह सुबह ,

प्रॉब्लम का सोल्यूशन तो एक ही है वो है कायम चूर्ण .............

12 जुलाई 2011

वो मय थी

एक पयमानेसे मय जाने कहाँ गुम हो गयी ???

लगता है ये तो बुँदे बनकर बादलमें घुल गयी !!!!!!!

छलक पड़ी जब बादलोंकी हँसी बिजलीके रूप में कहीं !!

ये मय फिर बरसकर मेरा पयमाना भर गयी ,

वो शराबथी जो तुम्हारी आँखोंसे छलक रही थी ,

वो मय थी जो तम्हारी झुल्फोंसे टपक रही थी ..........

11 जुलाई 2011

जब धूप .....

धूप जब सिलवटोंमें आती है ,

सिलवटोंके भीतर बादलकी सतहें नज़र आती है ........

बादलोंकी चुनर बूंदोंके तानोंबानोंसे गुथी हुई सी लगी ,

हवाओंके साथ वो चुनर उड़ती जाती है .......

ये कैसे कश्मकश है जिंदगीकी ??!!

जिसका इंतज़ार करते रहे हम

उसके आनेसे लगा ,

वो इंतज़ारके लम्हे कितने भले से थे !!!

अब पास हो फिर भी दूर से ,

जब दूर थे तो सिर्फ हमसे जुड़े थे !!!!!!

कविता

जब धूप .....

10 जुलाई 2011

ये इज़हार हो जाते है .....

आज तो लगते आपके अन्दाजें बयां कुछ और ही है ,
लगता है बादलसे आपके रुखसार पर बूंदोंके लिबासमें अल्फाज़ बरसे है .....

कभी कभी एहसास जुबाँकी देहलीज पर ठहर जाते है ,
न जाने क्यूँ फिर ये कलमसे नहा धोकर कागज़ पर बह जाते है ????

छुपाना चाहते हैं न जाने कितने राज़ हमसे ?
ये उठती झुकती पलकोंसे वो अनायास बयां हो जाते है !!!!

इन्कार मत कीजे जुबाँसे यूँ जब आपको भी है हमसे इश्क बेइंतेहा,
आप क्या जानो नज़रोंसे भी ये इज़हार हो जाते है .....

9 जुलाई 2011

अब के सावन ......

ये बरसातमें शबनममें छुपकर बरसती है शमा ,

शमा की न जलन होती है कम ,

ये सावन ही कहलाता है इश्क का साथी

जो पानीमें आग बरसाता है ...............

बुँदे ठहर जाती है चेहरे पर ,

जैसे जलती शमा पर मोम अटक जाती है ,

ठन्डे पानीमें जलकर वो

याद पियु की दिलाती है .....

अबके सावन यूँ बरस जा कुछ ,

तेरी बूंदोंसे एक पाति लिखूं पियासे ,

गौना करा कर ले जाओ अपने संग ,

बाबुल का अंगना अब रास न आवे .......

8 जुलाई 2011

बहकीसी बुँदे .....

कलसे मौसम कुछ गुनगुना रही थी ,
हौलेसे जैसे किसीसे प्यारका इज़हार कर रही थी ,
नज़्मसी बहकीसी बुँदे ,
पानीसे एक आग लगाकर चली गयी ,
सारी फिज़ाओमें कुछ इश्किया नशा महसूस महसूस किया ,
बस एक पुरानीसी तस्वीरसे धुलकी परतें उतरती गयी ....
वो बारिशकी बुँदे , वो खुशबु भीगी मिटटी की ,
वो दिये जलते हुए आँखोंमें उनके इंतज़ार के ...........
एक ख्वाहिश गुनगुनाती हुई ,
एक ख्वाहिश इस सावनमें भीग जाने की ....
धीरे धीरे धीरे जैसे चढ़ता नशा ......
मौसमका या इश्क का !!!!!

6 जुलाई 2011

तुम बिन ...

जिसे चाहते थे अपनी हर सांसके साथ
आज हमारे दरम्यां ये दूरियां क्यों है ??????
कहते थे हमें वो तुम बिन एक पल भी जीना गवारा नहीं ,
फिर इतने फासले बन गए क्यों ?
शायद ये हमारी ग़लतफ़हमी होगी
की उनकी रहमदिलीको हमने प्यार समजने की गुस्ताखी कर ली .....
हमारे दिल का क्या कसूर था ,
की उन्होंने हमसे यूँ झटक लिया अपना दामन ???
या फिर उनको हमसे कोई बात से शिकवा हो गया ???
इस सारे सवाल के जवाब है तुम्हारे पास ही ...
हमारे तो सवाल भी आधे अधूरे से है तुम बिन ....

4 जुलाई 2011

एक एहसास

आज मैंने देखी बंद आँखोंसे एक दुनिया ,
ना कोई रंग था ,ना कोई आकार था ,
बस एक पहचान आवाज की थी ,
एक पहचान स्पर्श की थी .....
कुछ गहरे एहसास होते है
जो आँखोंसे देखे नहीं जा सकते ,
पर स्पर्श बोल देता है बिना कोई शोर किये .....
उसकी गहराई तो ये है ,
बाहरी सुन्दरतासे नावाकिफ होते है ये ,
पर इस आकारसे इंसानकी उंचाई पता चल जाती है .....
याद रह गयी जो मैंने देखी बंद आँखोंसे दुनिया ,
उसे देखना नहीं महसूस करना ही गवारा हुआ ......

2 जुलाई 2011

वाह क्या बकवास कविता है !!!!!!

एक खोया खोया सा चाँद
कल मेरे आँगनमें उतरा .....
कल अमावस थी
तो उसकी ऑफिसमें छुट्टी थी ....
कहा उसने कितने खुशनसीब है इंसान !!
उसे एक हफ्तेमें शनि रवि वीक एंड मिलता है .....
यहाँ तो बारह घंटे उनतीस दिन
नाईट शिफ्टमें काम करना पड़ता है .......
रातके अँधेरे में कुछ उल्लू ,कुछ चमगादड़ ,
कुछ जुगनू नज़र आते है ....
रातके फैले काजलमें तो सभी जीव सो जाते है ....
उब गया हूँ मैं भी अब यूँही रात अकेले अकेले घूमते ,
सितारे भी थक गए है अब तो वो भी टूट जाते है एक एक करके .....
चलो आज तुम मेरे साथ कुछ तो बतिया लो ,
मेरे कुछ गम को सुनो और कुछ ख़ुशी देकर जाओ ......
मैंने उसे डी वी डी पर गोलमाल सिरीज़ की चार फिल्मे दिखाई ,
तीन बड़े मग चाय पिलाई ,
और थोड़ी पकोड़ी भी खिलाई .....
खाकर खुश होता चाँद सुबह होते चला गया ,
फिर अगली अमावस आने का फिर वादा कर गया ......

1 जुलाई 2011

एक नन्हा सा ख्वाब ......

कभी ढलती हुई शामके आंचल तले
छुपकर एक ख्वाब बैठा होता है ....
नन्हे बच्चे जैसा .....
कभी खड़ा होता ,कभी संभलता ,कभी गिरता हुआ ,
लेकिन अपनी भोलीसी सूरत पर सच्ची हँसी लिए .......
वो ख्वाब जिसे आंचलमें भरने को दिल करता है मेरा ,
अपनी गोदमें बैठकर खूब सहेलाऊ उसे .....
वो मेरी गोदमें सोया रहे ,
और मैं उसके लिए एक लोरी सुनाती रहूँ शबभर ..........
वो शामका आंचल धीरे धीरे सुर्खसे श्याममें बदलकर ,
मेरे ख्वाबको पंख देकर उडा ले जाता है .....
एय ख्वाब तेरे ख्वाबको भी क्यों तरस जाऊं ???
इतना बड़ा धोखा सूरज चाँदके भेसमें आकर दे जाता हो जैसे ..............