30 जून 2011

कुछ ना कहो ....

कोई आकर कहींसे हौलेसे छू गया ऐसे ,

जैसे चेहरे को छू गयी बारिश की पहली बूंद .........

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बारिशने क्या कहा धरती से ?

धरती एक सालके इंतज़ारमें कितनी जली तू ????

तेरे जर्रे जर्रे को छूकर मेरी बूंद भी गरमा गयी ,

ये प्यास कुछ घटा गयी या और बढ़ा गयी ???

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एक मुठ्ठी आसमानको कैद करके देखा ,

वो तब भी खाली था ,और अब भी खाली ही निकला ......

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किसीकी याद जब बेक़रार कर गयी हो

तब ही उसका आना इंतज़ारके लुत्फ़का मज़ा ख़त्म कर गया ......

28 जून 2011

?????????प्रश्न ...

जिंदगी का कौनसा पल तुम्हे सबसे मुश्किल लगा ???
बस वही जो सबसे सरल था ......
कौनसा पल सबसे प्यारा था ????
वो तो अभी तक आया नहीं है ....
कौनसा पल हँसी छोड़कर गया ????
जिस पल आपने किसीके होठोंको मुस्कराहट दे दी......
कौनसा पल रुलाकर गया ???
जिसमे हमारे कारण किसी को चोट पहुंची हो ..........

कौनसे पल को याद रखना चाहते हो ???
वो सारे पल जिसमे हमने गलती की और उसे सुधारना है ....
कौनसे पल को भुला देना है ????
जिसमे हमने किसीका कुछ भला किया है ...मदद की हो .....
इसका अंजाम क्या होगा ????
लोग हमारे जीते जी हमें मुर्ख कहेंगे पर फिर ....
एक भले इंसानके रूप में हमेशा याद करेंगे ......

26 जून 2011

लम्हा लम्हा ..तन्हा तनहा ...

कैसी होती है तनहाई ये अब हमें मालूम हुआ ,
सच होता है कडवा कितना ये अब हमें मालूम हुआ ,
कहीं कोई नाराज़ हो ना जाए ये सोचकर सच बोल ना पाए थे ,
सच बोलने का अंजाम इतना तनहा कर देगा ये अब हमें मालूम हुआ ...........
कहीं कोई राह पर गुजरते हुए कल तक थे जो हमसफ़र ,
कांटेकी पगडण्डी पर आकर साथ छुटा जब तब हमें मालूम हुआ ,
दुनिया तो साथ देगी तब तक जब तक राहें फूलोंकी बनी है ,
कांटे पर चलना पड़ेगा अकेले ही ये अब हमें मालूम हुआ .............
वो गैर होते तो कोई शिकवा भी नहीं करते होठोंसे हम ,
ये घाव जब अपनोंसे मिले तो दिलका टूटना क्या होता है ???
सच बोलने का अंजाम सिर्फ आंसू ही क्यों होता है ?
अब खुले आकाशमें फरमाई ये कैद की सजा है ये अब हमें मालूम हुआ .........

25 जून 2011

कुछ तस्वीरें सिक्किम में ..









पहली तस्वीर न्यू जलपाईगुडी की और जाता हुआ तीत्सा नदी से गुजरते रस्ते की है ...

दूसरी तस्वीर छान्गू लेक की है ......

तीसरी तस्वीर बाबा मंदिर के बाहर की है ...ये एक सैनिक की याद में बनाया गया है ...इसमें आज भी सालो के बाद उस सैनिक की आत्मा है ऐसा कहा जाता है और वहां पर पानी की बोतल ले जाते है भोग चढाने के लिए ...



सिक्किम की ओर रुख करें तो !!!

माय ड्रीम डेस्टिनेशन ......अ विजिट टू सिक्किम .......
हम गुजराती लोग को दार्जिलिंग चाय कुछ जचती नहीं है ...बिलकुल फिक्की लगे ...क्योंकि दूध से भरपूर कड़क मीठी पिने की आदत ठहरी ...लेकिन हां उसे लेमन टी बनाकर पिने का मजा भी हमने दार्जिलिंगमें सिखा ....तीन दिनमें तो सारा दार्जिलिंग घूम लिया ....फिर बाज़ार में घूमते घूमते पता चला गंगटोक यहाँसे सिर्फ चार घंटे के रस्ते पर है ...और वहां से जलपाईगुडी आरामसे जा सकते है ...कभी सुना या देखा नहीं था वो जगह पर हम तीनो अकेले जाने के लिए रवाना गए चौथी सुबह को ही ....टेक्सी मिलती है पर हेड उस वक्त सिर्फ सवा सौ रूपये चार्ज किया था .....जैसे स्टेट बदला पहाड़ोका रूप भी बदल गया ...अब स्टेप पर बने खेत आ रहे थे ....पेड़ भी बदलने लगे ...बोर्डर पर वेल ड्रेस जवानोने स्वागत किया .......
दोपहरमें पहुचे गंगटोक के टेक्सी स्टैंड पर .....पतिदेव एक अच्छे होटलमें ठहराने का इंतजाम करके आये ...मजे की बात तो ये है की यहाँ स्टिप ढलान पर बनी होटल जितनी ऊपर दिखती है उतनी है अन्दर यानि की हमारी भाषा में तहखानेमें भी निकलती है ...हमें पेंट हाउस जैसा कमरा मिला ......पहले नहाना धोना हुआ ....फिर बाहर शाम पॉँच बजे ही अँधेरा होने लगा ...जब बत्तियां जली तो लगा अरे वाह !!! ये तो हम सितारोंके बीच ही रहने को आ गए यार !!!!फिर खाना नाश्ता करके निकले तब पता चला राजकोटसे आया एक गुजराती फेमिली भी यहाँ ही ठहरा है ...सच कहे हमें वतनसे तक़रीबन ढाई से तीन हजार किलोमीटर पर वो हमारे स्वजनसे बिलकुल कम नहीं लगे ...फिर हमने दुसरे दिन का प्लान बनाया ...वहां से बाबा मंदिर देखने का प्लान किया ...फिर निकल पड़े तीनो गंगटोक की सैर को ....बाप रे एक रोड से दुसरे रोड पर जाने को भी चढ़ाई थी ....वहां रिक्शा तो मिलने से रहा ...चढ़ते रहो बच्चू .....एक होटल पर लिखा था गुजराती थाली ......हँसी आ गयी ....पहुच गए ...पता था दो सब्जी पंजाबी दाल और रोटी एक थाली में परोसे जायेंगे ...और हो जाएगी गुजराती थाली ....पंजाबी पकवान गुजराती नाम ....फिर भी मजा आया ...सफ़र का येही तो मजा है ...गुजराती लोग का ये प्रवास प्रेम ही था की ये गुजराती थाली की खोज नहीं करनी पड़ती ...खाना खाकर एंवे घूम रहे थे ...रस्ते और लोग दोनों डिसिप्लिन वाले थे ...उस दिन दीवालीका अगला दिन काली चौदस थी ...सब दुकान पर लाईट लगा रहे थे ...चहल पहल बिलकुल नहीं थी ....

उस दिन मुझे गुजरात ...मेरा सूरत ...और मेरा वड़ोदरा बहुत याद आ गया ...इस दीवाली कितने दूर थे हम ...कितनी रौनके लगती है गुजरात में पर यहाँ लगता ही नहीं था की दीवाली कल है ....फिर रात आठ बजे मुझे चाय पिने की इच्छा हो गयी ...एक छोटे से होटल के बाहर लिखा था चाय मिलेगी ...मजे की बात तो ये है की मेरे परिवार में सिर्फ मैं ही चाय पीती हूँ ...पर वहां तीनो पहुंचे ...चाय बनाने को कहा और थोड़ी कड़क भी ....बाहर अचानक एक गुजरातकी बोली में आवाज सुनी ....अरे अहिं चा बा मलवानी के नहीं ??? मेरे पति देव ने अन्दर से ही आवाज लगाईं ....आवी जाव अहिं मली जशे ....एक बुजुर्ग उसके डॉक्टर बेटे के साथ आये ....ना जान पहचान पर एक बोली ने बांध दिया हमको ....हमने साथ चाय पी और जैसे कोई दोस्त हो ऐसे वो हमें उनके होटल के रूम पर ले गए ....बातें ऐसे हुई जैसे बरसों से जान पहचान हो ......आज भी मेरे पति उनसे फोन पर बात करते है ...मिया बीवी डॉक्टर थे ...उनका फंडा अच्छा लगा ...पूरा दिन घुमने के लिए महंगे होटल में ठहराने की कोई जरुरत नहीं .....वो लोग प्रवास का असली लुत्फ़ लेने के लिए हमेशा सेकण्ड क्लास में ही घूमकर आनंद लेते है ....

दुसरे दिन सुबह हमारे साथ ठहरे राजकोट के फेमिली के साथ हम बाबा मंदिर देखने रवाना हुए ...ड्राईवरने कहा ऊपर बर्फ वर्षा हो रही है ...दीवाली का सबसे बड़ा त्यौहार था .....उस दिन मैंने सुमो की खिड़की से जो नज़ारे देखे वो मैं शब्दोंमें बयाँ नहीं कर सकती ....ये एरिया पूरा मिलिटरी के कब्जे में है ...पत्थर पर बने रस्ते में जितने ऊंचाई उतनी ही गहराई ...बीचमे बादल के ऊपर हम ...बादल नीचे हम ऊपर ...लगता था वेनीला आइसक्रीम बिछा है ....वहां से छान्गू लेक पहुंचे ...वहां पर हमें किराये पर और कपडे जेकेट ,जूते वगैरह लेने थे क्योंकि ऊपर बारह हज़ार फीट पर बर्फ वर्षा हो रही थी ....नाथुला पास जहाँ पर चाइना बोर्डर है वहां जाने को एक दिन पहले अनुमति लेनी पड़ती है जो वक्त हमारे पास नहीं था तो सिर्फ बारह हजार फीट के बाबा मंदिर पर बरफ की वर्षा को देखते हुए पहुंचे .....सांस थोड़ी फूल रही थी ....पर मजा आ गया ....बर्फ को महसूस की बारिश के रूप में .....चार चार गर्म कपडे पहन कर भी ठण्ड लग रही थी ....दोपहर तक वापस लौटे ...शाम को हमसब ने दीवाली पर्व पर समुह्भोजन किया ..मैं चूरमा के लड्डू ले गयी थी ...उस लड्डू को खाते हुए सब खुश हो गए की चलो दीवाली सच्चे अर्थ में मनाई गयी ......
दूसरी सुबह न्यू जलपाईगुडी के लिए निकलना था ...सुबह बारिश हो रही थी फिर भी निकल पड़े ...सामने लिखा था गुजराती ढोकला मिलेगा ....गए तो कहा थोड़े आगे एक और दुकान है ...बारिश में ढोकले को ढूँढने का ये ट्रेजर हंट भी मजेदार रहा ...गए तो वो तो खमण था ...हँसे फिर भी खाने की मजा ली ....दोपहर एक अच्छी जर्नी के साथ फिर कोलकाता के लिए ट्रेन पकड़ने टेक्सीमें रवाना हो गए .......
वैसे सिर्फ सिक्किम भी जाओ तो वहां युम्ठुम वेल्ली भी है ..और कई हसीं जगह है ...पर हमारे पास सिर्फ एक दिन था तो हम येही देख पाए ...गंगटोक शहर भी अच्छा लगा .....जहाँ नाम तक ना सुना हो उसके बारे में कुछ भी ना सुना हो ऐसी जगह पर जाने का रोमांच ही कुछ और होता है ....गर मौका मिला तो जरूर एक बार सिर्फ गंगटोक जाना चाहूंगी ....आई लव हिमालय अ लोट .........
लोग भी अच्छे ...और प्यारे ...भारत सचमुच हर कौने में अपना अलग सौन्दर्य बिखेरता है ....जाकर महसूस करो ....

24 जून 2011

दूर दूर दूर ...कहीं

कोई बिना शोर करे सरक गया ,
हौले हौले दूर ...दूर ...दूर .....दूर ......कहीं ...
ना कोई सन्देश ,ना चिठ्ठी ,
कल तक तो रोज शाम उठना बैठना था ,
ना उसके नामको याद किये सुबह का होना था ,
ना कोई गिला था उनसे मुझे
ना उन्हें कोई मुझसे शिकवा .......
फिर ये क्या हुआ ???
कुछ चटका ...ना कोई खनक ,ना कोई दरार ,
एक शीशा जिसकी किरचे भी बिखरी नहीं कहीं ,
फिर भी कुछ टूट गया ...
भीतर मेरे ,भीग गया भीतर मेरे ,
तनहा हो गया भीतरसे ,
बस इतनी सी इल्तजा है अय रबसे मेरी ,
उसके दिल पर एक संदेस लिख देना ,
गर भूले से कोई गलती हो गयी
तो बड़े दिल से मुआफ कर देना ......

23 जून 2011

आज यूँही थोडा ......

मुझे वो जलती धुप जला ना पाई ,
तेरे प्यार का साया मेरे सर पर था ......
मुझे बर्फ की ठंडक सिहरा ना पाई ,
तेरे प्यारकी गर्माहट मेरे आंचलमें थी .....
मेरे पैर सहराको नंगे पाँव पार कर गए ,
क्योंकि तेरा दुपट्टा मेरे हर कदम पर बिछा था .......
मैं सबसे ऊँची पहाडी पर जा पहुंचा ,
क्योंकि तेरा हौसला मेरे साथ था .........
आज मेरी दुनिया उजड़ गयी ,
मेरे पास धनदौलत सब कुछ था बस एक तु और तेरा प्यार ना था ......

21 जून 2011

कुछ भीतर ...

सूरजसे लड़ लड़ कर थक चूका हूँ ,
पर राख नहीं हुआ अब तक ...
रोशनी जलाती रही तिल तिल कर ,
चांदनी मरहम बन सहलाती रही ...
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एक नज़्म ऐसे ही बन जाती है ,
एक खिली हुई सुबहमें उसकी हँसी गूंज जाती है ....
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तुम्हे प्यार करने का सबूत नहीं मेरे पास ,
जिन्दा सिर्फ तेरे लिए हूँ ये सबब काफी नहीं ???
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आधी अधूरीसी हो जाती है हर शाम ऐसे ,
सूरज के साथ मेरी परछाई भी सो जाती है ....
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तेरा प्यार आंसू पर भी नासूर बन उभरता गया .....
क्या करें दर्दे दिल की दवा ना पी क्योंकि तेरी फुरकतमें भी जीना रास आया .....

20 जून 2011

बूंदों का संदेस

मैं बूंद हूँ ...
बादलमें छुपी हुई ....
अरे तुम बेताब हो पर कोई मुझको तो पूछो !!!
मुझे पल दो पल बादलकी बाहोंमें सिमटने दो ....
ये पागल पवनकी चुनर ओढ़ बादलकी गोदमें सोने दो ना !!!
ये इश्क दो पल और फरमाने दो ....
थोडासा सूरजको भी हमें चिढाने दो ना ....
जिस पल हम बिछड़ जायेंगे ....
ये पल बहुत ही भारी गुजरेगा हम सब पर ...
मुझ पर ,बादल पर ,उन रंगों पर जो बादल रंगता है मेरे लिए ,
उन पवनके झोंको पर जिस पर हम सवार है ....
उन समंदर पर जिसने हमें उधार दिया है नदी के लिए ,
फिर पूरा आकाश रोयेगा मेरे बिरहा पर ....
थोड़ी और देर मुझे बादलसे इश्क फरमाने दो ...
थोडा मेरे सैयां बादल की बाहोंमें रहने दो ....
आउंगी मैं बूंद बूंद बरसाने तुमपर ....
मेरे वादे पर यकीं कर लो ....

19 जून 2011

अजब सवालके गजब जवाब .....

चलो आज अजब सवालके गजब जवाबके खेलमें शामिल हो जाए :
१....बताओ की कल रातमें छतसे गुजरनेवाला प्लेन आया था ???
= नहीं ....
१अ ..क्यों ???
=उसका टायर पंक्चर हो गया था .........
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२ ........आज वो काली गाय रोटी खाने क्यों नहीं आई ????
=उसकी आज बॉय फ्रेंड के साथ डेट थी ...पिज़ा खाने गई है ....
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३ .......सबसे अच्छी कजरारी आँखें किस की है ????
= गाय की ..गौरसे देखो काजल और मस्कारा भगवानने ही लगाकर भेजा है .....
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४...तुम्हे शेरसे क्यों डर नहीं लगा ????
=क्योंकि वो तो टी वी के परदे की तस्वीरमें था ....
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५....सूरज एक दिन नहीं निकलेगा तो क्या होगा ?????
=चाँद का ओवर टाइम ....गर वो अमावस नहीं हुई तो ...
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६...मम्मी आज बाजूवाली आंटी इतनी जोरसे भोंक क्यों रही है ???
=कल डिनरमें गलतीसे कुत्ते वाले बिस्किट खा गयी होगी .....
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७....अगर आसमां नीचे और जमीं ऊपर होती तो ????
=हम सभी शीर्षासन करते हुए चलते फिरते ...क्योंकि बुजुर्गोने कहा है पाँव हमेशा जमीं पर रखो ....
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८...बढती हुई ट्राफिककी समस्या का कोई हाल आपके पास ????
=अब हवामे उड़ने वाले वाहनमें ही सफ़र करो .......थोडा ट्राफिक डायवर्ट हो जाएगा ...
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९... तुम्हे रातमें कौनसा सपना सबसे अच्छा लगता है ????
=जिसमे मेरी सास और बीवी ना हो वो सभी सपने .....लेकिन ये बहुत कम नसीब होता है ...
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१०.... एय प्रीति ,तुमने आज ऐसी पोस्ट क्यों लिखी ????
=क्योंकि आज मेरा दिमाग हड़ताल पर गया है ......मतलब छुट्टी पर भेजा है ...बड़ा ही थक गया था ....

18 जून 2011

ये ज्यादा अच्छा लगेगा ...

आज वो खामोश क्यों है ???
कितना पुकारा ...कोई जवाब नहीं ....
एक उदास नज़र ....
जिसमे ना कोई शिकवा ना गिला ....
याद आ गयी वो पुरानी शिखा ...
जो हसती रहती थी हरदम ....
चेहरे पर मुस्कान ओढ़कर आती थी ....
हँसी के गुलदस्ते देकर जाती थी ....
मन खिला खिला रहे वो खुशबू देकर जाती थी .....
आज मैं ढूंढ रहा हूँ वो शिखा .....
क्या इलाज़ होगा उसकी खोई मुस्कराहट ढूँढने का ???
बस वही जो आज तक उससे पाया है तुमने ....
उसे कुछ तो लौटाने की कोशिश तो करो ....
वो हँसी के गुलदस्ते तुम सजाने की कोशिश तो करो ...
उसे भी कभी ख्वाहिश रही होगी खिले हुए से मनसे बिखरती खुशबूकी .....
बस सुख पाना अच्छा लगा हरदम ....
अब सुख देकर भी देखो ....
ये ज्यादा अच्छा लगेगा .....
वो शिखा को वापस लेकर आओ ....

17 जून 2011

वो क्या है ???

तुम्हे देखते रहे ख्वाबों के आयनेमें ,
शायद क्या था वो ??
खुद हमारा अक्स ,
या तुम्हारी आँखोंमें मेरा ख्वाब ???
क्या येही प्यार हिया ????
तुम्हारे मिलने की कोई आस नहीं थी बाकी ,
क्योंकि अब शायद रगमें बस गए कुछ इस तरहसे
सांस बनकर चलने लगे लहू बनकर बहने लगे ...
क्या ये ही प्यार है ???
जिस्म जरिया होता है प्यार को पाने का ,
या मंजिल ???
बस ये ही प्यार की ऊंचाईको मुक़र्रर कर जाता है ......
हाँ ये ही प्यार है .....

16 जून 2011

हमार बिनती तोहार को ....

एय बादल तु इतना सफ़ेद क्यों है ???
तु तो राधाके श्यामसा ही मोहे सुहाए ....
तरस गयी तोरे दरस को अँखियाँ
पर तु कारा होकर क्यों ना आवे ???
चलो हम सागर को फुनवा लगावत है ,
एय सागर इ का होई गवा तोहार को ?
कोई कट्टी हुई गवा बदरा से ?
क्यों ना जल भरत उसकी गगरियामें ???
थोडा सा जल देकर तेरा भण्डार तो खाली होगा नहीं
तो फिर देदे थोडा जल हमरे बदरवा को भी ....
एय पागल पवन जल भरके गागर बादर की भारी गयी है ,
तु भी थोडा धक्का लगा दे ,
अब पवनपंख पर होकर सवार बदरा
तु हमार अंगनाको भीगा दे .....
तेरी सखी बिजुरिया को बोल थोडा कम गरजे ,
बस यूँही आँखे चमकाए तोहार संग डोले ....
मेरा अंगना तोरा जल ...
बरस बरस एय कारे घन तो हमरा मन भी पावे थोडा हर्ष ......

15 जून 2011

और कितना तरसाओगे ???बदरा!!!

एक कोरी कोरी हवा है ,
एक कोरा कोरा बादल है ,
एक कोरी कोरी आंखोमे
एक भीगा भीगा काजल है ....
एक कोरेसे इंतज़ारमें बरस जाता है दिल ,
एक कोरेसे वीराने को तरस जाता है दिल ,
बस इस कोरी गर्माहटसे पिघल जाता है सागर ,
कुछ बुँदे भरकर बरसाता है एक जड़ी सावनकी ,
बस गिले गिले सिले सिले नज़ारेमें छलक जाता है दिल ....

14 जून 2011

तितली आई ....

एक दिन चाँद सितारे सूरज जुगनू
जमघट लगाकर बैठे थे तालाब के किनारे ...
पेड़ोंकी थी छाया घनी ,
उस पर अंडेवाले घरौंदेकी कतारें थी .....
पंछी बैठे डाली डाली ,
वनचर बैठे पेड़ की छाँव ......
सबके होठों पर एक ही शिकायत है आज ,
सब अपनी स्थितिसे नाखुश है आज ....
चाँद कहे मैं घटता बढ़ता सिर्फ रात और सितारों का साथ ,
सितारे शिकायत करें चाँद को जाने सब हमारा तो ना कोई नाम ,
सूरज कहे मैं जलता रहा युगोंसे तिल तिल कर
जग रोशन होता ही जाए ......
पेड़ कहे हम घूम फिर ना पाए ,
सब छाँव पाए हमसे पर हम तो धुपमें जलते जाए ,
बरखा भिगाए हमें तोड़ भी जाए ,
पर हम से लोग अपनी चीजें बनाये ...
पंछी को दाना नसीब हो जब मिलो पड़े उड़ना ,
वनचर एक दुसरेको खाकर पेट भर पाते अपना ,
डर डर के दिन बिताते ....
तभी आई नन्ही सी तितली फूलोंसे मधु चुराकर ,
कोमल पंख हिलाते रंगबिरंगी लगी वो बतियाने ...
सूरजमामू तुम ये सोचो अपने बारे में ,
आप ही तो है जिसके पास है ताकत की जग रोशन कर पाए ,
चंदामामा क्यों मायूस तुम ??? तुम पर तो सारे जीव प्यार लुटाते ,
सितारों दुखी मत होना तुम बिन चाँद और रात दोनों अधूरे है ...
वृक्ष तुम चलते फिरते ना हो भले ,
तुममे छाँव देनेकी शक्ति ,जीवोके घरौंदे भी सजाते ....
जानवर तुम ये तो सोचो तुम तो क्षुधापूर्ति का कारण हो ,
जो किसीसे रोटी ना छीने पर किसीका पेट भर पाते ...
पंछी तुमतो उड़कर गली गली शहर दुनिया देखकर आते ,
क्यों तुम सब अपनी जिंदगी से खुश नहीं रह पाते .....
कमी तो हम सबमे है बहुत सी ,
पर हमारी एक खूबी से होता है ये जहाँ रोशन .....
उड़ती फुदकती तितली उड़ गयी दुसरे बागान ,
पर संदेसा छोड़ गयी वो खुश रहने के नुस्खे आसान ......

12 जून 2011

डब्बा ....

दिमाग एक डब्बा है .....
फ्लेक्सिबल डब्बा ....
बस ठूंसते रहते है हम उसमे सभी वक्त बेवक्त ....
जो देखते जो सुनते जो कहते ....
उसका कोम्प्यूटर भी है अजब ...
सही चीज सही जगह स्टोर करता है ...
रातमें दिमागकी धार नींद के वक्त तेज करता है ....
फिर भी उसमे जब वायरस लगता है !!!
फोर्मेट कैसे किया जाय वही पता नहीं चलता है ....
चलो आज पूरा दिमाग खाली करो .....
बीचोबीच एक अनिच्छित विचारोको छान ले
ऐसी छलनी रखो किडनी जैसे ....
नीचे एक महीन बारीक़ छिद्र बना दो .....
जो है निकम्मा उसे जाने की जगह दो ......
डब्बे की जगह हवा पानी और सूरजकी धुप मिले
ऐसी ही जगह पर बनादो ...
ओवरलोड का खतरा दूर हो सकता है .....
वायरस धुपमें ही जल सकता है ...
मुस्कान बनी रहती है होठों पर सदैव ...
ये जहाँ जीने जैसा लगता है .........
आज रविवार की छुट्टी है तो कल बता देना ,
पर एक संवैधानिक चेतावनी याद रखना ,
डब्बे को अप साइड डाउन मत रखना .....

11 जून 2011

दस्तक

शायद एक पयगाम आ जाए उनसे ,
उस ख्वाहिशमें निगाहें तकती रही राहको दिनभर ,
बारिश घने बादलोंसे रो रही थी ,
उन्होंने दस्तक दी दरवाजे पर रूबरू ...........
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एक कुचले हुए कागज़ परसे बह रहे थे जजबात ,
अल्फाज़के आंसूको पोंछने के लिए खोला कागज़ ,
उम्मीदे किसीसे बांधी थी बिना कोई शर्त किये ,
शायद इसी लिए उसे कुचल कर फेंकी गयी थी .........
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ना राहोंमें ना चाहोंमें कहीं ना मिल पाए मुझे मेरे अल्फाज़ ,
वो तो मेरे घरके दरीचों पर बैठे मेरा इंतज़ार कर रहे थे .......

9 जून 2011

जाने भी दो यारो

मुझे जरुरत है आज वातानुकूलित प्यार की ................
खानेमें मेगी नुडल्ससे पेट भरना चलेगा ,
रोटीका बनना महीनेमें एक बार भी चलेगा ,
पर घरमें बड़े सोफे होने जरुरी है
नींद उसमे सो कर ना आये तो चलेगा ......
मिलती है हर चीज आज किश्तों पर यारो ,
प्यार यार ना मिले तो चलेगा ....
लड़के की तनख्वाह होनी चाहिए छ आंकड़ोमें
चरित्रमें थोडा ढीला ढाला हो तो चलेगा ....
सासू साले को संभालना जरुरी है यारो लाखोके दहेज़ के बाद ,
माँ बाप भाई बहेनसे मुंह मोड़ लेंगे तो चलेगा ......
लोग तो बी एम् डब्ल्यू कार को देखकर इम्प्रेस होते है ,
घरमें कल के लिए राशन नहीं होगा तो भी चलेगा ....
क्रेडिट कार्ड पर मुहैया है अब तो सभी बाज़ार में ,
बेंकमें उतना बेलेंस नहीं होगा तो चलेगा ......
करोडपति के लिस्ट में नाम है ये बहुत बड़ी बात है यार ,
इंसानियतके नाम पर एक धब्बा भी हो तो चलेगा .....

8 जून 2011

तेरा साथ

मेरी प्रिया ,
तुम आज बहुत याद आई ,
आज मुझे एक अनजान जगह पर जाना है ,
वो स्टेशन नया था ......
तुम साथ होती तो एक साथ होता ,
तुम मेरा हाथ थाम लेती ,
तुम वहां किसीसे कुछ भी पूछती लेती ,
किसीसे पता पूछती ,
वहां जाने का रास्ता और रिक्शा भाडा भी जानकर आती ,
और फिर एक नए शहर का नया सफ़र नए अंदाज़में करते हम ....
तुम्हारी नज़रसे दुनिया देखने का मज़ा ही और होता ....
तुम्हारी नज़र जो देख पाती वो मेरी आँखे नहीं देख पाती ,
अलगसी हो तुम ...
तुम्हारा नजरिया भी एक अलग ही है ,
शायद इसी लिए तुम जिंदगीसे भरी भरी लगती हो हरदम ,
और हम खाली खाली ...
तुम जिंदगी को जी लेती हो ,
और हम जिंदगी को कभी कभी घसीटते है ....
बस तुम बहुत याद आई ......बहुत ...
मेरे पास मेरे में समायी हो पर हाथ नहीं साथ नहीं ...

7 जून 2011

सलाम आया ...

बादल पर लिखा हुआ उनका सलाम मिला ,
हम ना मिले तो क्या हुआ ,
बस एक दुआ का इस ओर आना जाना हुआ ,
क्या मिलन क्या जुदाई
दिल के तहखानेमें यादोंके हुजूमका बस जाना हुआ .......

6 जून 2011

एक सवाल

कल पूरा दिन मिडियामें बाबा रामदेव छाये रहे...वैसे तो मैं राजनीती पर ज्यादा कुछ लिखना पसंद नहीं करती पर कल एक मंत्री महोदय की टिप्पणी पर कुछ कटाक्ष वाली हँसी आती रही ....
उन्होंने कहा की बाबा योग गुरु है उन्हें सिर्फ योग ही सिखाना चाहिए और उन्हें पोलिटिक्सके आसन नहीं सिखाने चाहिए ....
बस मेरा एक ही सवाल है इस देश के शासकोंको करने को मन किया है :
हमने इस देश की धुरा बागडौर आपके हाथ में इसी लिए दूसरी बार भी सौंपी थी की आप सुशासन करे ....और आपको येही करना चाहिए था तो फिर आपकी सरकारमें बैठे लोगोने ये इतने बड़े पयमाने पर भ्रष्टाचारके आसन क्यों किये ??? इतने किये की आम आदमी के लिए तो अब दो जून की रोटीभी मुश्किल हो जा रही है ...और जेल के अन्दर से ज्यादा बाहर भ्रष्ट लोग घूम रहे है .....
आपको भी सिर्फ लोगोका भरोसा कायम करना होगा और गलत लोगो को उनकी सही जगह जेल पहुंचाना होगा ...

5 जून 2011

मेरे पौधे मेरे पेड़ का जन्मदिवस



मेरे अंकुरित बीज के पौधे होने के इंतज़ारमें
लो ये एक और साल बीत गया ......
फिर थोड़े वृक्ष का नाजायज खून हो गया ,
फिर थोड़े जायज पौधे का जतन हो गया ,
वृक्षकी खोजमें समुन्दर भी
सुनामी बन कर धरती पर आ गया ......
मानव सर्जित परमाणुको ध्वस्त करके
वो मासूम वृक्षोंके खून का बदला ले गया ......
क्या खोया क्या पाया ???
ये नादाँ इंसान उसके हिसाबमें ही उलझ गया .....
वहां वो गमलेमें खिला पहला फूल
ये देखकर मुस्कुरा गया .......
जलके जीवचर भी त्राहिमाम है तेरी खुदगर्जीसे ओ मानव ,
थलके जीवचर भी हो चले है बेघर ......
बादल भी बेलगाम होकर कहर बरसाने लगे है ,
पवन भी बस आंधी बनकरकी तूफानी बनने लगे है ,
धरतीके पेटकी लौ अब
बर्फीले देशोंमें ज्वालामुखी बन आग उगलने लगी है .....
अब भी कुछ बाकी है तबाही के नए मंज़र खड़े करने को ????
या फिर पेड़ोंके जतनकी
पहल करने को शुभ मुहूर्त निकलना बाकी है ????
खुद को बचाने का एक रास्ता बचा है अब तो ....
अपने घरके फर्नीचरके बगैर जीना सिख ले ,
वर्ना फिर कुदरतको खफा करके खुदकशी कर .....

4 जून 2011

सब कुछ उल्टा पुल्टा

मुझे मना मत करो ....
मेरी कल्पनाओका घरौंदा आज सजाना है ,
मोर के पांवमें घुंघरू बांध दूँ ....
आकाश को समुन्दरकी लहरोंसे नहला दूँ ...
चांदनी कांप रही है थर थर क्यों ???
उसे सूरजकी किरणोंका कम्बल ओढ़ाकर सुला दूँ ....
बांसुरी का गला सुख रहा है प्याससे ,
उसे ठन्डे ठन्डे नदियाँके लहरमें नहला दूँ ???
बहती हवाको एकतारेके तारमें बांध दूँ !!!!
बस एक ख्वाहिशका मनचला तूफ़ान
तहस नहस कर रहा है कोर कागज़ को इठलाता हुआ ....
चलो उसे अल्फाज़ की ज़ंजीरमें बांधकर कविता बना दू !!!!!

3 जून 2011

कहीं तो कोई तो ...

कहीं तो कोई है जो दुआ बनकर आ जाता है ,
कोई तो है जो आपमें रहकर खुद को समाता है ,
वो अनदेखा चेहरा जिसकी तलाश रहती है उम्र भर ,
पर वो तो हमारे दिलमें ही धडकता जाता है ....
तलाश हमारी रूकती नहीं ,
कभी सामने किसी चेहरे को पाकर लगता है ,
हाँ ये वही है जो हममे छुपा है ,
उसे गर ये एहसास हो
तो ये रिश्ता रूहानी कहलाता है ....

1 जून 2011

इंतज़ार

लौटोगे कब ???
ये कहना है ...पर अभी अलविदा भी ना कहा मैंने ???
बस ऐसे ही तुम्हारा जाना तो अच्छा है ,
पर जिंदगीके कुछ पल मेरे अज़ीज़
बस शुन्यवाकाशमें चले जायेंगे ....
बस वहां पर आप हमें सबसे ज्यादा याद आएंगे !!!!!
यादोंका सिलसिला एक बार फिर चल पड़ेगा ....
बस यूँही तुम्हारे लौटने का इंतज़ार होगा ...
और तुम आ जाओगे तो मुझे पता भी नहीं चलेगा
तुम मेरे सामने मेरे पास होगे
और मैं अभी भी तुम्हारे खयालोमें ......

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पायी ...