एक कोरे सफे पर कुछ एहसास बिखर जाए ,
दिल कहे कुछ खामोश निगाहें अफसाने बन जाए ,
झख्म कुछ पुराने फिर उभरते जाए ,
उसकी टीसमें फिर तुम्हारा नाम सुनते जाए ........
कहीं गुमशुदासी शाम दूज के चाँदसी मुस्कुरा जाए ,
उस मुस्कराहट लिए वो गुलाबकी पंखडियोंसे लब दिख जाए ,
घूँघटमें अधढका तुम्हारे चेहरे का चाँद ,
मेरे जीवन की हर सुबह रोशन कर जाए ....
तुम्हारे तसव्वुरकी तड़प लिए
पलक भी झपकना भूल चुकी हो जब ,
तुम्हारे क़दमोंकी आह्टभर से ,
मेरा बेजान बना दिल फिर से धड़क जाए .....
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
28 फरवरी 2011
24 फरवरी 2011
उसने कहा ...
कभी शाम को ढलते सूरज को देख
याद आता है हर सुबह एक संध्या को छुपाकर आती है ,
सूरजको देखकर याद आता है ,
कुछ उम्मीदे देकर गया था ,
शाम को पूछता है कुछ हुआ या नहीं ???
कभी हाँ बोल कर सर हिलाते है ,
कभी ख़ामोशी से ना कह देते है ,
फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
कल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......
याद आता है हर सुबह एक संध्या को छुपाकर आती है ,
सूरजको देखकर याद आता है ,
कुछ उम्मीदे देकर गया था ,
शाम को पूछता है कुछ हुआ या नहीं ???
कभी हाँ बोल कर सर हिलाते है ,
कभी ख़ामोशी से ना कह देते है ,
फिर एक ढाढस बंधाता है मुझे ,
कल की सुबह कुछ जरूर लेकर आएगी ......
23 फरवरी 2011
नाराज़ है आज ...
उस नदी की लहरें किरन को बहा कर ले गयी ,
क्या हुआ सितम उस पर के सात रंग के टुकड़ोंमें काट कर ले गयी ???
कल सूरज भी लेगा जवाब उस नदी से ,
तो कहेगी नदी रास्ता रोक रही थी मेरा
तो मैं उसे भी सागरसे मिलाने को ले गयी .....
थोडा सब्र तो करो ,
जब सागर तुम्हे बादलोका तोहफा देगा तुम्हे ,
तुम उस किरन को पा लेना ...
ख़ुशी से नाचेगा पानी भी उस किरन से
तुम मेघधनु का हार खुद पर सजा लेना ......
क्या हुआ सितम उस पर के सात रंग के टुकड़ोंमें काट कर ले गयी ???
कल सूरज भी लेगा जवाब उस नदी से ,
तो कहेगी नदी रास्ता रोक रही थी मेरा
तो मैं उसे भी सागरसे मिलाने को ले गयी .....
थोडा सब्र तो करो ,
जब सागर तुम्हे बादलोका तोहफा देगा तुम्हे ,
तुम उस किरन को पा लेना ...
ख़ुशी से नाचेगा पानी भी उस किरन से
तुम मेघधनु का हार खुद पर सजा लेना ......
22 फरवरी 2011
एक कश्मकश.....ठहरू या नहीं ?????
उसे मैं कभी समजमें नहीं आई ,
क्यों ? पता नहीं ....!!!
मैंने उसे समजाने की कोशिश नहीं की ,
मैंने सुलझनेकी कोशिश नहीं की ,
मैं उसके शिकवे गिले सब सुनती रही ,
चुपचाप ..ख़ामोशीसे ....
किसने कहा प्यार में सिर्फ राह मिलती है फूलोंकी !!!
कभी राहमें बीछे कांटोकी चुभन भी चुपके से सहनी होती है .......
लेकिन मैं उसे समजती थी पूरी तरहसे ....
उसे आसमां सी ऊंचाई की चाह थी ,
उसे उंचाईसे प्यार था ,
और मैं जमींसे जुडी एक जर्रा धुल का ....
जिस पर उसके पैर टिके थे ,
जो ऊंचाईकी थकनके बाद
उसका आरामगाह का ठिकाना बन जाए शायद ....
क्या करूँ ???
उसका इंतज़ार करूँ ???
या फिर ....
उसकी सुनहरी यादोंकी शोलमें लिपट गुमशुदा हो जाऊं ???
क्यों ? पता नहीं ....!!!
मैंने उसे समजाने की कोशिश नहीं की ,
मैंने सुलझनेकी कोशिश नहीं की ,
मैं उसके शिकवे गिले सब सुनती रही ,
चुपचाप ..ख़ामोशीसे ....
किसने कहा प्यार में सिर्फ राह मिलती है फूलोंकी !!!
कभी राहमें बीछे कांटोकी चुभन भी चुपके से सहनी होती है .......
लेकिन मैं उसे समजती थी पूरी तरहसे ....
उसे आसमां सी ऊंचाई की चाह थी ,
उसे उंचाईसे प्यार था ,
और मैं जमींसे जुडी एक जर्रा धुल का ....
जिस पर उसके पैर टिके थे ,
जो ऊंचाईकी थकनके बाद
उसका आरामगाह का ठिकाना बन जाए शायद ....
क्या करूँ ???
उसका इंतज़ार करूँ ???
या फिर ....
उसकी सुनहरी यादोंकी शोलमें लिपट गुमशुदा हो जाऊं ???
21 फरवरी 2011
गुजारिश
एक पंछी को सीखना है पंख पसारना ,
एक पंछी को पंखो को खोलना सिखा दो ,
बहुत उड़ाने कैद है छोटे छोटे पंखो में ,
आओ उसमे आसमां की उचाइयां भर दो .....
ख्वाहिशोंसे ऊँचे होसलो पर सवार उसका मन ,
देखो गगन छूकर निकल जाने को बेक़रार है ........
एक पेड़ की टहनी है उसके ठहरने के इंतज़ार है ,
कुछ तिनके पड़े है राहोंमें उसका घोसला बनने को ,
कुछ दाने बिखरे है एक घर के अहातेमें चुगनेके इंतज़ारमें ,
बस एक बार पंख फैला दे तु ,
सारी कायनात तेरी स्वागत में बेक़रार है ........
एक पंछी को पंखो को खोलना सिखा दो ,
बहुत उड़ाने कैद है छोटे छोटे पंखो में ,
आओ उसमे आसमां की उचाइयां भर दो .....
ख्वाहिशोंसे ऊँचे होसलो पर सवार उसका मन ,
देखो गगन छूकर निकल जाने को बेक़रार है ........
एक पेड़ की टहनी है उसके ठहरने के इंतज़ार है ,
कुछ तिनके पड़े है राहोंमें उसका घोसला बनने को ,
कुछ दाने बिखरे है एक घर के अहातेमें चुगनेके इंतज़ारमें ,
बस एक बार पंख फैला दे तु ,
सारी कायनात तेरी स्वागत में बेक़रार है ........
20 फरवरी 2011
सुबह में चाँदसे मिलना मेरा ..
एक बड़ी सुबह ,
रोशनी हलकी हलकी सी ,
अँधेरे के दामन को पकडे हुए ,
चली आ रही थी हौले हौले ....
हम चल पड़े इस शीतसुबहमें सैर को ,
घर से निकल देखा ,
चाँद एक पेड़ की टहनी पर पैर टिकाये इंतज़ारमें था मेरे ,
श्वेत चाँद इंतज़ार की थकावटसे पिला पड़ गया था ....
चाँद की तश्तरीमें मुझे मोहब्बत दिख गयी ,
ऐतबार था उसमे मेरे आने का ....
फिर क्या ???!!!
बस चाँद को सामने रखे हुए हम सीधी सड़क पर चलते रहे ,
चाँद कहता रहा ,मैं सुनती रही ,
चाँद घने पेड़ के पीछे छुपता रहा ,
मैं उसे तेज चलते हुए ढूंढती रही ....
चाँद मुस्कुरा रहा था ,
मैं हंस पड़ी ....
फिर एक लम्बी सैर पर चाँद ने मेरे गाल को सहलाया ,
और कह रहा था ,
आज का साथ बस इतना ही ,
फिर मिलेंगे ....तुम हम ...हम तुम .....
कई लोग मेरे साथ चल रहे थे सड़क पर ,
पर उस चाँद को सब अनदेखा करते चलते रहे ,
सारे राह इश्क फ़रमाया चाँद से हमने ,
फिर भी दुनिया की नज़र से बचे ही रहे ....
क्यों ???
दुनिया चाँद पर पहुँचने में लगी रही है ,
पर चाँद को आँगन में देखने की फुर्सत नहीं .....
रोशनी हलकी हलकी सी ,
अँधेरे के दामन को पकडे हुए ,
चली आ रही थी हौले हौले ....
हम चल पड़े इस शीतसुबहमें सैर को ,
घर से निकल देखा ,
चाँद एक पेड़ की टहनी पर पैर टिकाये इंतज़ारमें था मेरे ,
श्वेत चाँद इंतज़ार की थकावटसे पिला पड़ गया था ....
चाँद की तश्तरीमें मुझे मोहब्बत दिख गयी ,
ऐतबार था उसमे मेरे आने का ....
फिर क्या ???!!!
बस चाँद को सामने रखे हुए हम सीधी सड़क पर चलते रहे ,
चाँद कहता रहा ,मैं सुनती रही ,
चाँद घने पेड़ के पीछे छुपता रहा ,
मैं उसे तेज चलते हुए ढूंढती रही ....
चाँद मुस्कुरा रहा था ,
मैं हंस पड़ी ....
फिर एक लम्बी सैर पर चाँद ने मेरे गाल को सहलाया ,
और कह रहा था ,
आज का साथ बस इतना ही ,
फिर मिलेंगे ....तुम हम ...हम तुम .....
कई लोग मेरे साथ चल रहे थे सड़क पर ,
पर उस चाँद को सब अनदेखा करते चलते रहे ,
सारे राह इश्क फ़रमाया चाँद से हमने ,
फिर भी दुनिया की नज़र से बचे ही रहे ....
क्यों ???
दुनिया चाँद पर पहुँचने में लगी रही है ,
पर चाँद को आँगन में देखने की फुर्सत नहीं .....
19 फरवरी 2011
जिंदगी एक ऐसा रास्ता ...
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ आरंभ का पता है
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ ट्रेजर हंट है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ अंत का वक्त और रूप पता नहीं ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मंजिल से ज्यादा खुबसूरत रस्ते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ अचानक आते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ के पीछे डरावनी ऊंचाई या गहराई है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ के पीछे हँसी वादियाँ भी लहराती है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ हमसफ़र मिलते बिछड़ते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई पलभर का साथ निभाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई जीवन भर साथ चलता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई ख़ुशी बिखेर जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई आंसू छोड़ जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी को भूल जाना बेहतर होता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी को हमेशा याद रखा जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी मंजिल से ज्यादा राहें और राहबरकी चाह रहती है ...
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ सब से ज्यादा खुलके जिन्दा रहना ही मायने रखता है ...
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ ट्रेजर हंट है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ अंत का वक्त और रूप पता नहीं ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मंजिल से ज्यादा खुबसूरत रस्ते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ अचानक आते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ के पीछे डरावनी ऊंचाई या गहराई है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ मोड़ के पीछे हँसी वादियाँ भी लहराती है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ हमसफ़र मिलते बिछड़ते है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई पलभर का साथ निभाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई जीवन भर साथ चलता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई ख़ुशी बिखेर जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ कोई आंसू छोड़ जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी को भूल जाना बेहतर होता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी को हमेशा याद रखा जाता है ,
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ किसी मंजिल से ज्यादा राहें और राहबरकी चाह रहती है ...
जिंदगी एक ऐसा रास्ता जहाँ सब से ज्यादा खुलके जिन्दा रहना ही मायने रखता है ...
17 फरवरी 2011
अजनबी
किसी लम्बी सी राह पर दो अजनबी का मिलना ,
एक साथ है ,
दो हाथ है ,
एक ख़ामोशी है ,
दो जुबाँ है ,
एक चाह है ,
फिर भी दो राह है ....
एक चाह होती है ,
फिर भी दोनों की राह बदलती है .....
चलते चलते रुक जाओ ,
अपने सपने को फिर से सोचो ,
शायद सामने वही तो है
जो सपने में पुकारता था ,
जो दिल पर दस्तक देकर छुप जाता था ,
जिसका तुम्हे इंतज़ार था ,
आपका दिल हर पल बेक़रार था ,
ये संयोग है ,
चलो आज उसके भरोसे जिंदगी सौंप दो ,
उसकी ख़ामोशी को पढ़ लो ...
एक साथ है ,
दो हाथ है ,
एक ख़ामोशी है ,
दो जुबाँ है ,
एक चाह है ,
फिर भी दो राह है ....
एक चाह होती है ,
फिर भी दोनों की राह बदलती है .....
चलते चलते रुक जाओ ,
अपने सपने को फिर से सोचो ,
शायद सामने वही तो है
जो सपने में पुकारता था ,
जो दिल पर दस्तक देकर छुप जाता था ,
जिसका तुम्हे इंतज़ार था ,
आपका दिल हर पल बेक़रार था ,
ये संयोग है ,
चलो आज उसके भरोसे जिंदगी सौंप दो ,
उसकी ख़ामोशी को पढ़ लो ...
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अन्दाजें बयां
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16 फरवरी 2011
कुछ अलग से एक दिन
कभी दिन जो निकलता है वो कुछ ऐसे निकलता है की उसे हमारे सारे प्लान की धज्जिया उड़ानी ही हो ....पर दिन के अंत में आप अगर सोचे तो कुछ अलग से गुजारा दिन हमें वो बहुत कुछ देकर जाता है जैसा हमने कभी सोचा था ...और रूटीन जिंदगी में इस बात की कोई सम्भावना हमें नज़र ना आई थी ....
मेरा कल का दिन कुछ ऐसा ही रहा .....
एक करीबी रिश्तेदार की मरणोत्तर उत्तरक्रिया में जाना था ...पर पिछले तीन दिन से शहर में रिक्शा की हड़ताल चल रही थी ...मैं के नजदीक के रिश्तेदार के घर गयी और वहां से हमें शहर के दुसरे छोर तक जाना था ....पौने घंटे के बाद भी रिक्शा नहीं मिली तो मैं और वो लेडी उसके घर बैठ गए ...वहां उसके घर ही खाना भी खा लिया सिर्फ सब्जी रोटी....ना हमारे दोनों के पतिदेव साथ थे ना ही बच्चे ....उन दो घंटे में हमने इतनी ढेर सारी बाते की वो भी बेफिक्र हो कर बिंदास ...खूब हँसे और कुछ दिल का गुबार भी निकला .....बाद में पतिदेव को फोन करके बताया की हम यहाँ है ...तेज धुप में चलकर घर वापस गयी .......कुछ रिश्तेदार बिच रस्ते इंतज़ार करके लौट गए ......पर ये जो एक तरह से बगावत कर ही ली वो मुझे सचमुच खुश कर गयी ...सब कुछ भूलकर कुछ पल अपने लिए भी ....
हमारे परिवार में सिर्फ महिलायें ही होती है जिसका जीवन बाकी लोग के पीछे चलता है और वो अपनी राह तक खो देती है कभी कभी गृहस्थी में खोकर ...पर ऐसे पल जी लेने चाहिए ठंडी हवा के झोंकोंकी तरह .......
कल मुझे सच मुच लगा मेरे ब्लॉग का शीर्षक यथार्थ : जिंदगी : जियो हर पल ....
मेरा कल का दिन कुछ ऐसा ही रहा .....
एक करीबी रिश्तेदार की मरणोत्तर उत्तरक्रिया में जाना था ...पर पिछले तीन दिन से शहर में रिक्शा की हड़ताल चल रही थी ...मैं के नजदीक के रिश्तेदार के घर गयी और वहां से हमें शहर के दुसरे छोर तक जाना था ....पौने घंटे के बाद भी रिक्शा नहीं मिली तो मैं और वो लेडी उसके घर बैठ गए ...वहां उसके घर ही खाना भी खा लिया सिर्फ सब्जी रोटी....ना हमारे दोनों के पतिदेव साथ थे ना ही बच्चे ....उन दो घंटे में हमने इतनी ढेर सारी बाते की वो भी बेफिक्र हो कर बिंदास ...खूब हँसे और कुछ दिल का गुबार भी निकला .....बाद में पतिदेव को फोन करके बताया की हम यहाँ है ...तेज धुप में चलकर घर वापस गयी .......कुछ रिश्तेदार बिच रस्ते इंतज़ार करके लौट गए ......पर ये जो एक तरह से बगावत कर ही ली वो मुझे सचमुच खुश कर गयी ...सब कुछ भूलकर कुछ पल अपने लिए भी ....
हमारे परिवार में सिर्फ महिलायें ही होती है जिसका जीवन बाकी लोग के पीछे चलता है और वो अपनी राह तक खो देती है कभी कभी गृहस्थी में खोकर ...पर ऐसे पल जी लेने चाहिए ठंडी हवा के झोंकोंकी तरह .......
कल मुझे सच मुच लगा मेरे ब्लॉग का शीर्षक यथार्थ : जिंदगी : जियो हर पल ....
लेबल:
सामाजिक दृष्टिकोण
| प्रतिक्रियाएँ: |
14 फरवरी 2011
प्यार को समजो कुछ ऐसे भी
प्यारकी तलाश तोहफोंमें मत कर अय नादान ,
तेरा दिल जो धड़क गया तो समज ये है प्यार का निशाँ ....
=====================================
प्यार दबे पाँव आने वाला एक जज्बा है ,
वो कभी शोर नहीं मचाता ,
शर्मीला है ये जज्बा इतना ,
की शोर होते वो छुप जाता है शर्मसे दुपट्टेमें लहराकर .....
========================================
पा लेने का नाम प्यार नहीं समज ये अधुरा है एक अर्थ ,
प्यार पूरा होता है जब ना पाते कुछ सब कुछ लुटा देता है कोई .....
तेरा दिल जो धड़क गया तो समज ये है प्यार का निशाँ ....
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प्यार दबे पाँव आने वाला एक जज्बा है ,
वो कभी शोर नहीं मचाता ,
शर्मीला है ये जज्बा इतना ,
की शोर होते वो छुप जाता है शर्मसे दुपट्टेमें लहराकर .....
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पा लेने का नाम प्यार नहीं समज ये अधुरा है एक अर्थ ,
प्यार पूरा होता है जब ना पाते कुछ सब कुछ लुटा देता है कोई .....
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प्यार का मौसम
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13 फरवरी 2011
प्यार के नाम छोटी छोटी बात ....
उसके सलाममें मेरा नाम नहीं था ,
क्योंकि उसकी निगाहोंमें मेरी तलाश थी ,
उसकी बेकरारीमें मेरा इंतज़ार था ,
मायने तलाश रहे थे जिस शब्दको शायद वही प्यार था .....
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मिलनेसे जिसे लगे मेरी दुआ कुबूल हो गयी ,
दूर हो जब मुझसे तो लगे अंधेरोंसे जिंदगीको दोस्ती हो गयी ,
वो आये जिस पल लौटके तो लगे मेरी सुबह हो गयी ,
उनके साथमें बीते पल कहे मेरी जिंदगी आज जन्नतका नूर हो गयी .....
===========================================
प्यार के पढ़े अफसानोंमें कभी यकीं नहीं हुआ ,
कोई मेरे दिलके कभी करीब नहीं हुआ ,
बस क़यामत का वो पल एक दिन क्या हुआ !!!
लगा मेरे वीराने दिलको उससे प्यार हुआ .....
क्योंकि उसकी निगाहोंमें मेरी तलाश थी ,
उसकी बेकरारीमें मेरा इंतज़ार था ,
मायने तलाश रहे थे जिस शब्दको शायद वही प्यार था .....
=====================================
मिलनेसे जिसे लगे मेरी दुआ कुबूल हो गयी ,
दूर हो जब मुझसे तो लगे अंधेरोंसे जिंदगीको दोस्ती हो गयी ,
वो आये जिस पल लौटके तो लगे मेरी सुबह हो गयी ,
उनके साथमें बीते पल कहे मेरी जिंदगी आज जन्नतका नूर हो गयी .....
===========================================
प्यार के पढ़े अफसानोंमें कभी यकीं नहीं हुआ ,
कोई मेरे दिलके कभी करीब नहीं हुआ ,
बस क़यामत का वो पल एक दिन क्या हुआ !!!
लगा मेरे वीराने दिलको उससे प्यार हुआ .....
लेबल:
प्यार का मौसम
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12 फरवरी 2011
वसन्त: प्यार की फुहार
बस एक शब्द तलाश कर रहे है हम ,
जो प्यार का मतलब समजा दे इस बार ......
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दिल की धड़कनका फोटोग्राफ देख लो ,
चलो मेरे दिल पर तुम्हारा ओटोग्राफ भी देख लो ....
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एहसास नदी की लहरों पर उसकी तस्वीर छोड़ जाते है ,
मेरे दिलके रेगिस्तानमें एक लाल गुलाब महकाते है ...
====================================
तुमसे कहने के लिए अल्फाज़ नहीं मिले ,
तेरे सर पर सजने के लिए कोई ताज भी नहीं मिले ,
कहना चाहा तुम्हे अपना तो अल्फाज़ नहीं मिले ,
फिर भी लगा हरदम तुम्हे देखकर की हम पहली बार नहीं मिले ...........
जो प्यार का मतलब समजा दे इस बार ......
==================================
दिल की धड़कनका फोटोग्राफ देख लो ,
चलो मेरे दिल पर तुम्हारा ओटोग्राफ भी देख लो ....
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एहसास नदी की लहरों पर उसकी तस्वीर छोड़ जाते है ,
मेरे दिलके रेगिस्तानमें एक लाल गुलाब महकाते है ...
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तुमसे कहने के लिए अल्फाज़ नहीं मिले ,
तेरे सर पर सजने के लिए कोई ताज भी नहीं मिले ,
कहना चाहा तुम्हे अपना तो अल्फाज़ नहीं मिले ,
फिर भी लगा हरदम तुम्हे देखकर की हम पहली बार नहीं मिले ...........
लेबल:
प्यार का मौसम
| प्रतिक्रियाएँ: |
10 फरवरी 2011
गब्बर सिंह एक बार फिर
ये पोस्ट भी मेरे एक अजीज दोस्त के द्वारा आज ही के दिन मुझे ईमेल से मिली थी ...कृपया ये मेरी खुद की रचना नहीं है .....
गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण
1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.
२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.
3. नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.
4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.
5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.
6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.
7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.
8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.
9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी
गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण
1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.
२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.
3. नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.
4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.
5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.
6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.
7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.
8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.
9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी
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हँसी ख़ुशी के पल
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8 फरवरी 2011
देसी वेलेंटाइन डे
आज प्यार के उत्सव पर ये मेरी सातसौवी पोस्ट .......
नयी कोपले दे रही है दुहाई प्यार को ,
देखो प्रकृति भी फूलोंके वस्त्रों का परिधान करके आई है ,
कहीं अनायास ही कोयलका धीमा सूर सुनाई देता है ,
ये प्रणय देवता कामदेव अपने फूलोंके धनुषसे
छोड़ रहे है रति पर प्रणय बाण .....
जवां दिल धड़कनेका मौसम जहाँ पर
नए प्रेम पुष्प का अंकुरण होता है ,
एक एहसास का झरना स्फुट होता है ,
प्रणय के आशियानेके दरवाजे पर एक दस्तक
दे रही है ये ऋतू जो दस्तक उसे वसंतपंचमी का आना ...
नयी कोपले दे रही है दुहाई प्यार को ,
देखो प्रकृति भी फूलोंके वस्त्रों का परिधान करके आई है ,
कहीं अनायास ही कोयलका धीमा सूर सुनाई देता है ,
ये प्रणय देवता कामदेव अपने फूलोंके धनुषसे
छोड़ रहे है रति पर प्रणय बाण .....
जवां दिल धड़कनेका मौसम जहाँ पर
नए प्रेम पुष्प का अंकुरण होता है ,
एक एहसास का झरना स्फुट होता है ,
प्रणय के आशियानेके दरवाजे पर एक दस्तक
दे रही है ये ऋतू जो दस्तक उसे वसंतपंचमी का आना ...
6 फरवरी 2011
जाम ए जहर ....
ये जाम ए जहर है इश्कका
बस खुमार ऐसा की जो पी ले वो जी ले ....
मर कर भी किसी पर रूह को सुकून कहाँ ?
विसाले यार कर के ही दो पल में पूरी जिंदगी जी ले ...
इश्क कोई जवानी या कोई उम्र का मोहताज नहीं ,
बस नज़र के वार पर घायल हो जाए कोई
और मर कर किसी पर जी ले कभी ...
लुफ्त जिंदगीका हमें कहाँ पता था ,
वो यार का दीदार था या दीदार ए खुदा था ,
बस सजदे में सर झुक गया उसके हमारा ,
हमने उसे बंदगी कहा या इबादत ए इश्क ....
खुदा का दूसरा नाम ही प्यार है इस जहाँमें ,
मरकर जी लूँ कभी यहाँ मैं भी ,
ये ख्वाहिश हर सांसका हरदम पयगाम मिला है ....
बस खुमार ऐसा की जो पी ले वो जी ले ....
मर कर भी किसी पर रूह को सुकून कहाँ ?
विसाले यार कर के ही दो पल में पूरी जिंदगी जी ले ...
इश्क कोई जवानी या कोई उम्र का मोहताज नहीं ,
बस नज़र के वार पर घायल हो जाए कोई
और मर कर किसी पर जी ले कभी ...
लुफ्त जिंदगीका हमें कहाँ पता था ,
वो यार का दीदार था या दीदार ए खुदा था ,
बस सजदे में सर झुक गया उसके हमारा ,
हमने उसे बंदगी कहा या इबादत ए इश्क ....
खुदा का दूसरा नाम ही प्यार है इस जहाँमें ,
मरकर जी लूँ कभी यहाँ मैं भी ,
ये ख्वाहिश हर सांसका हरदम पयगाम मिला है ....
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अन्दाजें बयां
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5 फरवरी 2011
एक बुलबुला ...
बुलबुला बहता गया नदीके पल्लू पर ,
कहते है कौन कैद कर पाया हवाओंको ,
बुलबुला हंस पड़ा देखो हवाओंको मैंने कैद कर लिया ,
सूरजकी एक किरन उसे नहला गया ,
सात रंगका जामा पहना गयी ...
बुलबुलेको ना थी कोई ख्वाहिश कनारेकी ,
ना उसे गहराईको नापनेकी चाहत थी ,
बहती हवाको अपनी बाँहोंमें भर वह तो चलता चला गया ,
लहरोंसे खेलता हुआ ,खिलखिलाकर हँसता हुआ ....
थक गया था शायद दूर तक आते आते ,
थोड़ी देर सुस्ताया फिर दुसरे बिंदुको हवा देकर लहर पर छोड़ दिया ,
देखो खामोशसा वह बैठा जलधारामें फिर खुद को मिलाता हुआ ....
कहते है कौन कैद कर पाया हवाओंको ,
बुलबुला हंस पड़ा देखो हवाओंको मैंने कैद कर लिया ,
सूरजकी एक किरन उसे नहला गया ,
सात रंगका जामा पहना गयी ...
बुलबुलेको ना थी कोई ख्वाहिश कनारेकी ,
ना उसे गहराईको नापनेकी चाहत थी ,
बहती हवाको अपनी बाँहोंमें भर वह तो चलता चला गया ,
लहरोंसे खेलता हुआ ,खिलखिलाकर हँसता हुआ ....
थक गया था शायद दूर तक आते आते ,
थोड़ी देर सुस्ताया फिर दुसरे बिंदुको हवा देकर लहर पर छोड़ दिया ,
देखो खामोशसा वह बैठा जलधारामें फिर खुद को मिलाता हुआ ....
4 फरवरी 2011
चलो चलें ???
कुछ रूककर चले,
तुम्हे ऐतराज़ ना हो गर
तो हाथ थामकर चलें ??
मंजिल एक भले ना हो अपनी
फिर भी मिले है गर नसीब से
तो कुछ कदम साथ तो चलें !!!!
आगे दोराहा आएगा ,फिर ?
अगर तुम्हारा साथ पसंद आ गया
तो हम तुम्हारे साथ चलेंगे ...
गर तुम्हे हाथ छोड़ना गवारा ना हो मेरा
तुम मेरे राह पर चल देना .....
गर दोनों की राह बदल गयी तो
एक दुसरेके दिल में यादो का घरौंदा बनकर चलेंगे ...
तुम्हे ऐतराज़ ना हो गर
तो हाथ थामकर चलें ??
मंजिल एक भले ना हो अपनी
फिर भी मिले है गर नसीब से
तो कुछ कदम साथ तो चलें !!!!
आगे दोराहा आएगा ,फिर ?
अगर तुम्हारा साथ पसंद आ गया
तो हम तुम्हारे साथ चलेंगे ...
गर तुम्हे हाथ छोड़ना गवारा ना हो मेरा
तुम मेरे राह पर चल देना .....
गर दोनों की राह बदल गयी तो
एक दुसरेके दिल में यादो का घरौंदा बनकर चलेंगे ...
3 फरवरी 2011
कीमत
जिंदगी कभी गुलज़ारकी नज़्म नहीं होती ,
कभी वो आसमांका चाँद नहीं होती ,
ये तो होती है बस जहनमें बसी कल्पनाएँ ,
और ये कल्पनाएँ कभी हकीकत नहीं होती .....
ए सी गाडीके अन्दर बैसाखकी तपिश नहीं होती ,
फिर भी इस ठंडकमें कभी हकीकतकी परख नहीं होती ,
दस व्यंजनसे भरे थालमें कभी भूखकी भड़क नहीं होती ,
उस व्यंजनमें मिलता है स्वाद कभी वहां भूख नहीं होती ....
जमींसे जुड़कर आसमांसे अंतर का पता चलता है ,
कीमत चूका देनेसे वो चीज़ कभी अपनी नहीं होती ,
कुछ चीजें हमारे लिए कभी जरूरी होती है बहुत ,
पर उस चीजें खरीदनेके लिए हमारे पास कीमत नहीं होती ....
कीमत हमेशा किसने कहा रूपोंमें ही कही जायेगी ,
उन एहसास को क्या कहे जिसकी कभी कोई कीमत नहीं होती ....
कभी वो आसमांका चाँद नहीं होती ,
ये तो होती है बस जहनमें बसी कल्पनाएँ ,
और ये कल्पनाएँ कभी हकीकत नहीं होती .....
ए सी गाडीके अन्दर बैसाखकी तपिश नहीं होती ,
फिर भी इस ठंडकमें कभी हकीकतकी परख नहीं होती ,
दस व्यंजनसे भरे थालमें कभी भूखकी भड़क नहीं होती ,
उस व्यंजनमें मिलता है स्वाद कभी वहां भूख नहीं होती ....
जमींसे जुड़कर आसमांसे अंतर का पता चलता है ,
कीमत चूका देनेसे वो चीज़ कभी अपनी नहीं होती ,
कुछ चीजें हमारे लिए कभी जरूरी होती है बहुत ,
पर उस चीजें खरीदनेके लिए हमारे पास कीमत नहीं होती ....
कीमत हमेशा किसने कहा रूपोंमें ही कही जायेगी ,
उन एहसास को क्या कहे जिसकी कभी कोई कीमत नहीं होती ....
2 फरवरी 2011
काशश...श ...काश ...
मुझे आपकी बहुत चाहत थी ,
आप मेरे लिए बहुत कुछ थे ,
आप मेरी जिंदगी के कुछ बेहतरीन लम्हे बनकर आये थे ,
मैंने बहुत सुकूनके पल भी पाए थे ,
पर हम ये आपसे कह ना पाए ,
ये सोचा वक्त आने पर कह देंगे ....
पर ये हो ना सका ...
पर ये हो ना सका ,क्योंकि ...
वक्त हमसे तेज निकला ...
उसकी रफ़्तारके साथ हम चल ना पाए ,
वक्त के साथ आप हमारा साथ और फानी दुनिया छोड़ गए ,
अब दिल में वो अल्फाज़ आज घुट कर रह गए है ,
अन्दर ही अन्दर एक अफ़सोस लिए ,
काश हम कह देते ...काश हम कह पाते .....
आप मेरे लिए बहुत कुछ थे ,
आप मेरी जिंदगी के कुछ बेहतरीन लम्हे बनकर आये थे ,
मैंने बहुत सुकूनके पल भी पाए थे ,
पर हम ये आपसे कह ना पाए ,
ये सोचा वक्त आने पर कह देंगे ....
पर ये हो ना सका ...
पर ये हो ना सका ,क्योंकि ...
वक्त हमसे तेज निकला ...
उसकी रफ़्तारके साथ हम चल ना पाए ,
वक्त के साथ आप हमारा साथ और फानी दुनिया छोड़ गए ,
अब दिल में वो अल्फाज़ आज घुट कर रह गए है ,
अन्दर ही अन्दर एक अफ़सोस लिए ,
काश हम कह देते ...काश हम कह पाते .....
1 फरवरी 2011
सुर्खियाँ
तुम्हारी नाराज़गी आँखों को गुलाबी कर गयी ,
तुम्हारी हया गालो को लाल कर गयी ,
तुम्हारे अल्फाज़ तुम्हारे लबोंको सुर्खी दे गए ....
तुम्हारी हयात मेरी जिंदगीको गुलाल कर गयी .....
ये सुर्ख जोड़ेमें सजी ये जिंदगी
अब दुल्हनके लिबासमें खुद को निहाल कर गयी ....
तुम्हारी हया गालो को लाल कर गयी ,
तुम्हारे अल्फाज़ तुम्हारे लबोंको सुर्खी दे गए ....
तुम्हारी हयात मेरी जिंदगीको गुलाल कर गयी .....
ये सुर्ख जोड़ेमें सजी ये जिंदगी
अब दुल्हनके लिबासमें खुद को निहाल कर गयी ....
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अन्दाजें बयाँ
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