27 फरवरी 2010

रंग बरस्यो लाल गुरार रे ....

मेरे दिल को बड़ा भाता है

जब ये रंगों का त्यौहार आता है ....

पुराने कपडेमें लिपटकर नया फ़साना दे जाता है ...

रोज तो नहाते है सुबह एक बार ही

ये दिन तो हमें दिन में कई बार नहलाता है ....

पानी भी नशा करता है रंगों का और रंगबिरंगी बन जाता है ...

ये पिचकारीमें भरता कहीं ,कहीं पूरी बाल्दी भरकर समाता है ,

इस पर भी कम लागे किसी मतवाले को तो हौज भरकर रंगीन पानी बनता है ...

काले पीले हरे लाल गुलाबी कोरे रंगसे हर चेहरा सुहाता है

बस हर चेहरे पर ख़ुशी का रंग ही नज़र आता है .....

गंदे कपडे ,रंगीन चेहरे से इंसान एक दिन के लिए बन्दरसा बन जाता है ...

अपनी इस असलियतमें भी वह इंसान ही नज़र आ जाता है ....

आओ राधा और गोपियों ,ग्वाले खड़े है गलियोंमें रंग गुलाल के थार भरके

बरसानेके लठ्ठ लेकर आ जाओ आज काना खेलेगा होरी .....

25 फरवरी 2010

सादगी

पता है दुनिया में सबसे मुश्किल काम क्या है ?

सादगीको समजना सबसे मुश्किल है ...दस डिजिट की गिनती आसान है पर दस बटा दो कितना ये आजकी पीढ़ी के लिए बिना गणकयंत्र बताना मुश्किल है ...ऐसा क्यों ? कहीं ऐसा तो नहीं की ऊपर चोटी की चाहतमें हम जमीं पर रहना भूल रहे है ???

आज कल मेक ओवर का जमाना है ..अपने रंग रूप को बिलकुल बदल सकते हो आप ...थोड़े पैसे होने चाहिए पर मनको बदलने का कोई ब्यूटी पार्लर खुला नहीं अब तक ...तनाव कम करने के नुस्खेके नाम पर वजन कम करने के नाम पर वही सादे जीवन जीने के लिए नए तरीके से लोगो को सिखाया जाता है जो पाश्चात्य जीवनकी असर में हमारी जिंदगीके मुलभुत सिध्धांत भूल रहे है ...

शायद आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की पिछले इक्कीस साल से मैंने अपने चेहरे पर पावडर भी नहीं लगाया ...लिपस्टिक दूर की बात है ...घर के बर्तन को छोड़ सारे काम खुद ही करती हूँ ...ना मुझे कोई जिम जाने की जरूरत पड़ी है ना कोई क्रीम की ...मेहनत की लाली चेहरे पर रहती है ...जाड़े के दिनोंमें कच्चे दूध की मलाई का जादू काम करता है .....जरूरत पड़े तो साइकिल चलाते भी शर्म नहीं महसूस होती ....ये सादगी की मजाक भी उडाई जाती है पर मुज पर कोई असर नहीं होता .....

इंसान को तंदुरस्त रहने का एकदम सादा नुस्खा एक ही है ...जिसे पढ़कर शायद सब यही कहेंगे की ये पोसिबल नहीं पर ये सच है :

रोज एक ही टाइम पर सुबहमें जाग जाओ ...खाने पिने का वक्त भी एक ही रखो ...रात को एक ही वक्त पर सो जाओ ..अपनी दिनचर्या के क्रम में छेड़खानी करना छोड़ दो ...पुरे छ घंटे की नींद ले लो ...शायद ही डॉक्टर की जरूरत पड़े ....ये आजमाया हुआ नुस्खा है .....साधारण बुखार हो तो एंटी बायोटिक दवाओं की जगह सादी दवाई लो ...शरीर को भारी दवाओं का आदि मत बनाओ ...जिंदगी ही तो सब कुछ है ...जब जिंदगी ही ना रहे तो सब कुछ पास हो पर इसका मतलब नहीं ....

24 फरवरी 2010

कलमने कहा चुपके ...

आज मेरी कलम यूँ बरबस रो पड़ी ...

कहने लगी मुआफ कर दो मुझे

तुम्हे कैसे बताऊँ मैं ?

तुम्हारे जज्बातों को बहला ना पाऊँगी अब मैं ...

तुम कहो जो वो सुन ना पाऊँगी मैं ...

कागज़ को खरोंचना यूँ गंवारा ना होगा मुझे ...

मेरे दिलके ज़ख्मोसे उसे यूँ कुरेद ना पाऊँगी मैं !!!!!

अपनी बेबसी लाचारी को तुम्हे भी ना समजा पाऊँगी मैं !!!!

इंतज़ार करना तुम मेरा यूँही , यहाँ पर ही ...

जब तक लौट ना पाऊं मैं !!!

तनहाईके आलममें फिर खुद को तलाश पाऊं मैं ......

22 फरवरी 2010

आज की सुबह मेरी नज़रसे ..

आजकी सुबह कुछ सदायें मुझे बुला रही थी ,

कुछ सदायें मुझे सुला रही थी ,

कुछ सदायें मुझे रुला रही थी ,

कुछ सदायें खुद को दोहरा रही थी ....

उस नटखट गिलहरी भागदौड़में ख़ुशी राग खयालीमें गा रही थी ,

चिड़िया भी दाना चुगने जाते हुए गीत गुनगुना रही थी ,

कौए महाशय कुछ कहते हुए बेसुरे तालमें आलाप रहे थे ,

इन के बीच बुलबुल भी आकर शोख ग़ज़लकी धूनमें डूब जा रही थी ....

भौरोंने फूलों की कैदसे आज़ादी का जोश जता रहे थे ,

तितलियोंको खिले फूलोंकी खुशबू अपने मधुके लिए दावतें दे रही थी ...

शांतिके दूत अमनका सन्देश खामोश रह कर दिए जा रहे थे ....

तब ये इंसान के बनाए गए

ट्रक के बेसुरे होर्न और रिक्शा के बेताल आवाज़की बेतुकी तान के बीच ,

मेरी रूह छटपटा रही थी .........

21 फरवरी 2010

मेरे मोबाइल का इनबोक्स खुला ...

हैप्पी बर्थडे टू यु .....

शोक्ड ????????

एक्च्युअली आज के दिन जेम्स हॉकने "ढक्कन " बनाया था ...

तो मैंने सोचा सारे "ढक्कनों " को विश कर दूं .....!!!!!!!!

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क्या है आपके प्यार का भविष्य ???

जानिये बस एक एस एम् एस से ....

....

टाईप -<योर नेम > लव्स <योर पार्टनर नेम >

और सेंड कर दीजिये अपने पापा के नंबर पर ...........

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बॉय : अगर मैं इस नारियल के पेड़ पर चढ़ जाऊं तो मुझे इंजीनियरिंग कॉलेजकी लडकियां दिख जायेगी ???

गर्ल :फिर वहां से हाथ छोड़ देना तो मेडिकल कोलेज की भी दिख जायेगी .....

19 फरवरी 2010

तनहाई कुछ बोल गयी ...

कसमोकी रस्मोको नहीं समजा हमने ,

हमने तो प्यारकी सच्चाई पर यकीं किया सदा .......

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बहते जलकी धारा

हथेलीको भीगो जाती है ,

ना रहता हो निशाँ साहिल पर मौजोंका

फिर भी किनारेकी भीगी रेत

तेरे आनेकी दास्ताँ बयां कर जाती है ....

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जाकर आज हाथ थाम लेते है उनका

बहुत अकेले हो गए है दिल टूट जाने के बाद ,

उनके आंसू को दामनसे अपने सुखा देंगे ,

क्योंकि हम तो कायल रहे उनकी मुस्कानके सदा से ...

17 फरवरी 2010

तेरा चेहरा ..


चाँदमें तराश दिया तेरा चेहरा ...

दीवार पर तस्वीरसा नजर आये तेरा चेहरा ....

क्यारीमें पौधे पर फूल बन नज़र आया तेरा चेहरा.....

सितारोके बीच दूजके चाँदसा ओज़ल तेरा चेहरा ...

मासूमियतकी जाल बुन खिलखिलाता उसमे तेरा चेहरा ...

अंगारोंकी आतिशका काजल लगा तेरा चेहरा ...

स्याहीकी शबनममें नहाकर एक ग़ज़ल बना तेरा चेहरा ....

जागी हुई आँखोंमें भी ख्वाबसा तैरता हुआ तेरा चेहरा ....

पहाड़ी झरनोंकी अठखेलियाँके शोरसा नज़र आये तेरा चेहरा ....

शमा पर हर रात टपकते मोममें भी नज़र आये तेरा चेहरा ...

ख़ामोशीके समुन्दरमें डूबता उतरता तेरा चेहरा ...

उगते सूरजकी लालिमा ओढ़कर आये कुछ कहने तेरा चेहरा ...

हिजरके पलोंमें सांसके बिना तडपते जिस्मसा लागे तेरा चेहरा ....

कल दफ़न कर दिया था जो जमींमें तेरा चेहरा ...

एक नटखट कोंपल बन उसी जमीं को चीर कर फिर नज़र आ ही गया तेरा चेहरा ....


16 फरवरी 2010

तुम्हारे आने पर ...

एक सहर एक कतरा एक जर्रा एक पयगाम लाया ,

तेरी यादमें तेरे आनेकी आह्ट भरसे महक गया है चमन ....

कैसे बयां करे धड़कनने भी दिलके दायरेसे बाहर आना चाहा ,

पलकें बोझिल हो रही थी शर्मोहयाके दामनमें सिमट रह गयी तनहा मैं ......

जुबान ख़ामोशीकी चादर ओढ़े सूखे होठो पर बैठ कांपने लगी ,

बस आकर तुने थामा मेरा हाथ अपने हाथमें लेकर मैं खड़ी गढ़ी पिघल गई एक शमा सी ...

15 फरवरी 2010

फिर आप याद आते रहे क्यों ???

कल रात सपनेमें फिर आपका ख्याल आया था ,

फिर हमें दिलमें अपने ख्यालोंमें आपको ही पाया था ,

क्यों ऐसा होता है कभी ,

बिछड़ने एक अरसेके बाद भी मिलते है हम ऐसे भी ....

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उड़ती गर्दने तुम्हारी तस्वीर उभारी

जिसे दौडके कुछ अंश हथेलीमें सजा लिए हमने .....

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दो बेलोंके बीच खिले एक फूलने

जिंदगी का मतलब समजा दिया ....

14 फरवरी 2010

हेप्पी वेलेंटाइन डे ...

शायद आज कल एक बदलाव रहा था मेरी कलममें ...

जीवजंतु शेर चित्ते भी आ चुके थे ...पर हम इन्सानको जो आज सबसे ज्यादा मुसीबत नज़र आ रही है वो पर्यावरणके मुद्दे को मद्देनज़र रखकार ही है ...हमारे जीवन के साथ एक तंदुरस्त जिंदगी के लिए ये जीवों का भी जीवित होना जरूरी है और इन जीवोके जीवित होने के लिए जंगलों का जीवित रहना भी जरूरी है ....

आज प्रेम का दिन है वेलेंटाइन दिन ...तो इस दिन को हमारे मानवीय प्यार के साथ उन सबके प्रति अपनी निष्ठां एवं प्रेम जताने की जरूरत है ...तो इन सब जीवोंसे भी अपना प्यार जताए ...

हम हमारे अपनों के साथ ये जीव श्रुष्टि का शुमार भी अपने प्यार की लिस्ट में शामिल करलें और उन्हें भी कह दे

हेप्पी वेलेंटाइन डे

13 फरवरी 2010

वेलेंटाइन सफारी ...

दिल टुटा था हमारा बड़ी जोर से ,

कई टुकड़े हो गए तो हम आज उनसे रूठकर एक जंगलमें चले गए ......

प्रवेशद्वार पर लिखा था इंसान को देख हम भी मना रहे है वेलेंटाइन दिवस ....

गम अपना भूलकर जंगलमें घुमने लगी मैं ...

पहले मिली मुझे शेरनी हाथमें मोबाइल लिए ,

कॉलरट्यून पर बज रही थी धुन एक :

तेरे बिना तेरे बिना मुश्किल है मेरा जीना ...

हम थोड़े चकराए शेरके मोबाइल को चेक किये

शेरनी के लिए रिंग ट्यून ये मिला :

क्यूँ पैसा पैसा करती है ,क्यों पैसे पे तु मरती है ?

हिरन हिरनी के लिए ऍफ़ एम् पर बजा रहा था :

जाने जा ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हे रात दिन ...

और प्रेमसे पीड़ित एक हाथी सुन रहा था एम् पि ३ पर :

तड़प तड़पके इस दिल से आह निकलती रही ,मुझको क्या सजा मिली ऐसा क्या गुनाह किया ?

एक कबूतरी नाच रही थी कबूतर के साथ गाते हुए :

काँटोंसे खिंचके ये आँचल ,छोड़ के बंधन बाँधी पायल ...

जंगली भैंस तालमें स्वीमिंग फरमा रही थी और अपने आंसू तालमें उंडेल रही थी :

अरे क्या करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिल गया ....!!!

मुझे आश्चर्य तब हुआ जब मैंने चीते के साथ एक मेमने को देखा ,

दोनों हाथों में हाथ लिए इश्क फरमा रहे थे और ये गा रहे थे :

मेरे हाथ में तेरा हाथ है ,सारी जन्नते मेरे साथ है ....

एक हिरनी जंगल के राजा को दिल दे बैठी और गा रही प्रेम के गीत यूँ :

तुझे देखा तो ये जाना सनम प्यार होता है दीवाना सनम .....

एक टेडी बेर लेप टॉप खोल कर बैठा था और बेरी को कह रहा था :

ये दूरियां ये राहो की दूरियाँ निगाहोंकी दूरियाँ ....

अचरज आज इस बात का हुआ ,

सब जानवरोंने उपवास किया था ,

प्यार था उनको जिससे उसे कैसे खा सकते है ?

आज के दिन तो प्रेम के गीत गाकर मना सकते है !!!!

जो ना समजा सका एक इंसान वो जानवर भी समजा गया ,

प्यार का नूर उसे किसी का खुदा बना गया ......

11 फरवरी 2010

शय है खुबसूरत शायरी है प्यार एक ...

चलो अब प्यार का मौसम शुरू हो रहा है तो आज थोड़ी सैर मुग़ल युगमें कर के आते है .....

याद होगा आपको अभी तक मुगलेआज़म का गाना प्यार किया तो डरना क्या ...एक कनीज के प्यार के लिए तख्तोताज न्यौछावर करते सलीमके पिता शहेंशाह अकबर इस प्यार की सख्त खिलाफत करते है ...दोनों का प्यार जुदाईमें तब्दील हो जाता है ...एक अनारकली को जिन्दा चुनवा दी जाती है ...

इसी मुग़ल युग में शहेंशाह शाहजहाँ अपनी मुमताज़ बेगमके प्रति प्यार को जताने के लिए एक ताज महल बनवाया जिसका आज दुनिया के अजुबोमें शुमार होता है और जिसे प्यार का प्रतिक माना जाता है ...उसके बेटे औरंगजेब जो इन बातों के सख्त खिलाफ था और शाहजहाँकी जिंदगी के अंतिम दिनोंमें उसे आगरा के लाल किले मैं कैद कर देता है जहाँ के एक झरोखे से वो यमुना नदी के दुसरे किनारे पर बने ताज को देख सके .....

प्यार के ये दो रूप एक मुग़ल युग में .....

आज ये बात इस लिए याद आती है की वेलेंटाइन दिन के आते ही भारतीय संस्कृतिके नाम पर इसका विरोध करने की एक खास मुहीम भी हर साल छेद दी जाती है ...पर हमारे यहाँ पर एक विशेष प्रयोजन इसी ऋतू में किया गया है "वसंत पंचमी " का ...जो प्रेम पर्व है ...जिस दिन शादी के लिए उत्तम लग्न मुहूर्त भी माना गया है ...हमें इस दिन का महत्त्व नहीं पता ...क्या करें अब अंग्रेजी माध्यम के पढ़े लिखे हम इस देसी केलेंडर को क्या जाने ????तो हमें तो वेलेंटाइन दिन ही पता है ....

अब एक बात कहूँ : आपको नहीं लगता की प्यार का एहसास इन नामों से कई उचा है ...हमें प्यार को याद रखना है जो किसी दिन का मोहताज नहीं ...जब जिस वक्त आपका दिल किसीके लिए धड़क जाए ,जिसकी हर ख़ुशीमें ही हमें अपनी ख़ुशी नजर आने लग जाए वही हमारे लिए इजहार का दिन है चाहे उस दिन चौदह फरवरी हो या ना हो !!!

अगर आपके दिल में किसी के लिए भी ये जज्बा पनपता हो तो उसे एक बार कह ही दो ...बहुत बहुत तो येही होगा की वो इनकार करेगा ...शायद हो सकता है की वो भी अपना प्यार छुपा रहा हो ....इस दुनिया में हर चीज़ अब बिकाऊ हो चुकी है पर पहली पहली बार किसीके लिए दिल का धड़क जाना ये अनमोल ही है ...जिसे धर्म ,जात पात किसीका बंधन नहीं .......दुनिया में अगर आप समर्पण की भावना को लेकर जीते हो तो हर लम्हा ,हर दिन ,हर महिना ,हर साल और ये सारी जिंदगी आपके लिए प्यार का मौसम बन सकती है ....ये भावना बिकाऊ नहीं ...पैसो से कोई दुकान पर नहीं मिलती .....

10 फरवरी 2010

प्यारा मौसम प्यार का ....

सरसराती हवाओं में प्यार की नमी है ,

गीली सिली ये हवाएं कुछ फुसफुसाती है कानोंमें ,

आ गया है फिर प्यार का मौसम ,

नयी गर्ल फ्रेंड को एक तोहफा देने का मौसम ...

पुरानी गर्लफ्रेंड को किया वादा तोड़ने का मौसम ....

लड़कियां यहाँ भी हमसे तेज ही निकली ...

डाकमें उसकी शादी है चौदह फरवरी को

इसकी निमंत्रण देती एक पत्रिका निकली .....

8 फरवरी 2010

शुन्यवाकाश ...

आपने कभी खुदमें शुन्यवाकाश महसूस किया है ? किया होगा पर ये जो हमारी दौड़ती भागती जिंदगी है ना वो ये सोचने का वक्त नहीं देती ...या फिर उसे हम डिप्रेसन या फिर मूड ऑफ़ है कह देते है ....

कुछ करने मन ना हो ...सुबह में बिस्तर छोड़ने को मन ना हो ...कुछ काम करने को दिल ना करे ...दिमागमें कुछ ख्याल भी ना आये ...जाने सारे मंज़र थम गए हो ....बैठे तो बैठे रहे ...आसमां को तकते रहे ...नहीं नहीं जानती हूँ की प्यार का मौसम बड़े करीब है और ये निशानियाँ प्यार होने की निशानियों से बहुत मिलती झूलती है ...बट नो वे मैं प्यार की बात नहीं कर रही ......

जैसे काम करना , प्रवृतिमें मगन रहना , जीना -सांस लेना जैसे ही जरूरी है शुन्यवाकाश का होना ...तब जिंदगी रूकती है ...थमती है ... कोई नया ख्याल आता नहीं ...अगर आप कोई सर्जनात्मक क्षेत्रमें है तो आपकी ये शक्ति भी क्षीण होती नज़र आती है ...कोई नयी कहानी या कविता भी नहीं सूझती , अपने आपसे आप संतुष्ट नज़र नहीं आते ...पर कहते है की वक्त ठहरता नहीं है वैसे ये वक्त भी गुजर ही जाता है ...लेकिन ये वक्त हमारे भीतर को खाली कर देता है ..अपने पुराने विचारों को उसमेंसे निकाल के खाली करके साफ़ सफाई करने का ये वक्त है ...फिर नए विचार खुद ब खुद उसमें पनपने लगेंगे ...और एक नयी उर्जा आपमें संचारित हो जायेगी ...फिर नए विचार नए मूड से ये बदलाव से आप भी खुश रहोगे और आपके अपने भी .....

सच कहूँ तो इस ब्लॉग पर आने वाले भी महसूस कर रहे होंगे की अब मैं रोज पोस्ट नहीं लिख रही हूँ ...शायद मैं इसी दौर से गुजर रही हूँ ....कुछ भी लिख देना जिससे खुद को भी संतोष ना हो ..इस से बेहतर येही होगा की इस कलम को थोडा विराम दे दूँ .......खुद को जानने की ये चेष्टा है ..आज कल मैं पढ़ रही हूँ ...अखबारों की रद्दीमें से ज्ञानवर्धक विशिष्ट पूर्ति निकाल कर उसे पढ़ती हूँ ...वैसे आपको जानकार शायद आश्चर्य होगा की मैं वास्तविकतासे जुडी हकीकत पढने की शौक़ीन हूँ ...विज्ञानं की खोज के बारे में पढना अच्छा लगता है ...कल में लेनिन और माओ त्से तुंग के शव उनके देश में किस तरह सहेज के रखे गए है ...उसकी प्रक्रिया उसमे आई अड़चन ..उसके बारे में पढ़ रही थी ...और जब लिखती हूँ तब प्यार इश्क मोहब्बत की कल्पना उभरती है ....मेरी कल्पना जब खुद की जिंदगी की हकीकत में आमने सामने होती है उसका आनंद बयां नहीं हो सकता ...और ये सब मेरे शुन्यवाकाश की ही डेन है ...ऐसा लगता है कभी कभी की नयी दिशा को भी मेरी प्रतीक्षा है ...वहां से बेहतर फूल चुनकर ला सकूँ .....

6 फरवरी 2010

फिर एस एम् एस की दुनियामें

दोस्तोंके लिए एक मेसेज :

कभी याद आये तो फोन करो ,यार !!!

पैसे कम हो तो एस एम् एस करो यार !!!

बिलकुल कड़के हो गए हो तो मिस कोल करो यार !!!!

और ये भी ना हो सके तो ....

मोबाइलको वायब्रेटर मोड़ पर रखकर दहीं में डाल दो

लस्सी बन जाएगी ,पीकर ऐश करो यार !!!!!

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इमरान हाश्मीका फ़िल्मी सफ़र :

इमरान हाश्मीने अपनी गर्लफ्रेंड को पहले "आशिक बनाया ",

फिर "चोकलेट " में " ज़हर " डालकर "मर्डर " कर डाला ...और कहा

"कलयुग "में "अक्सर " ऐसी ही "जन्नत " नसीब होती है .....

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फ्रेंड अंकलकी सूचि :

थ्री इडियट देखने के बाद अंकल और आंटियां अपने अपने दोस्त लोगों को ये मेसेज भेज रहे है :

शायद फिर से वो

तस्वीर मिल जाए ...

जीवनके सबसे हँसी

वो पल मिल जाए ...

चल ,फिर से बैठे

क्लास की लास्ट बेंच पर

शायद वापस अपने

पुराने दिन मिल जाए .......

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कोलेज का क्लास रूम ट्रेनके डब्बे जैसे ही होते है ....पहली दो बेंच रिजर्व कोच होते है , बिच की तीन से साथ बेंच जनरल कम्पार्टमेंट होते है ...और लास्ट दो बेंच वी आई पी लोगों के लिए स्लीपर कोच होते है ....

5 फरवरी 2010

दो जू की दास्ताने मोहब्बत


वो निशाकी झुल्फोंमें था जादू ,
वो पूजाके लहराते बालोंकी थी कशिश ,
बस आशियाना बना था किसी का वो
बस एक प्यार की कमी थी ,
एक दिन निशाकी जुल्फोंसे ईशा नामकी जूने
मोबाइल किया पूजाकी जुल्फोंमें बसे साहिल को ....
है जो उसका पहला प्यार बना ...
हाल कैसा है जनाब का ?
दुजेने कहा क्या ख्याल है आपका ???
ईशाने कहा हम यहाँ पर ऐश फरमाते है ,
रात को टहलने भी जाते है ...
निशाके टकलू पतिके सर पर हम स्केटिंग करके आते है ...
ऐ सी में नींद भी जमकर आती है ...
घुंघराले लम्बे केश में खून की कमी कभी ना सताती है ....
साहिल तो गममें डूब डूब गया रोते हुए
कहने लगा ये हमारी मुलाकात आखरी है ....
मैंने पूजाकी बाथरूममें आज मेडिकरकी बोतल पाई है ...
हम कल रहे ना रहे तुम हमें याद कर लेना ...
आज पूजा शायद ब्यूटी पार्लर जायेगी हेर कट करवाने को
हम वहां कोई नया घर ढूँढेगे कंगे में जमकर ...
बड़े अच्छे दिन मुझे बहुत याद आयेंगे
जब हमें खुशबू वाले तेल मदहोश कर जाते थे ,
वो क्रीमके भी थे जलवे और बादामका तेल पुष्ट बनाने को ...
ईशा तब बोली बस मैं तो जूठी बातों से दिल बहलाती हूँ ...
चमेली तेलकी गंधसे मैं यूँ ही मर जाती हूँ ...
तब एक लिखिए ने (जू निकालने वाली बारीक कंगी )ईशा के सर पर किया वार ...
नेट वर्क टूट गया और एक प्रेम कहानी का करुणांत हो गया ....

4 फरवरी 2010

सैर सपाटा ....

बहुत बोल चुके अब एक चुप्पीसे वफाएं करनी है ,

उदासीके पल जी लिए ग़मोंके चादरमें लिपटे ,

अब खुशियोंसे यारी करनी है ,

कहते है छुपी है है वह दो पलोंके बीच पूल पर ...

क्या करें ? बन्दरकी तरह कई पलों पर छलांग लगाकर

कूदने फांदने की आदतसी हो चली है ,

जल्दी पहुंचना है मंजिल पर हमें

जिसके पतेकी चिठ्ठी तो हमसे गूम हुई है ....

चलो अब ख़ामोशीसे दोस्ती कर ली

नज़रें कुछ और चौकन्नी कर ली ....

चलती है जहाँ भेडचालमें एक भीड़

हमने बस पगडंडियोंसे यारी कर ली ....

रास्तेंमें खुशियाँ मिलती रही ....!!!!!!!!!!!!!

कभी कोयल की कूक बनकर ,कभी रेंगते सांप सी ,

कभी हाथी की दूम सी , कभी शेरकी दहाड़ सी ...

चलो हम अब हाथ में हाथ लेकर एक सैर को चलें .......

2 फरवरी 2010

मेरा मेहमान ...

कभी मन करता है बस ,

कम्बलमें लिपट कर आँखें यूँ मीच ले जैसे सुबह हुई ही नहीं ....

नींद भी आ गयी ...फिर एक के बाद एक आवाज आने लगी

शोर का नकाब ओढ़कर ...ठण्ड की सिरहनसे ये नहीं कांपती ...

बस अपने वजूद को दिखा देने का मौका कब मिले

येही दिन भर भांपती रहती है ....

बस शोर के बीच कभी बुलबुल चहक उठी

मेरे घर में भूल से आ गयी थी ...

इस मेहमान को मिलने मैं भी दीवानी बेतहाशा दौड़ पड़ी ....

बस एक छोटा सा मुखड़ा गाकर वो भी वहांसे चल पड़ी ....

बहुत शोर था ...कोहराम था ...पर ....

पर ....

एक कशिश थी उस बुलबुल के गानेमें

जो मुझे बरबस उसका वजूद जताकर गयी ...

अभी भी इंतज़ार है ....उसका ...बुलबुल का ....